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केंद्र को उम्मीद, NCTC को लेकर नरम होंगे नीतीश
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
Updated Tue, 09 Jul 2013 01:03 AM IST
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बोध गया के महाबोधि मंदिर में हुए बम विस्फोट को लेकर फिर खुफिया एजेंसियों के अलर्ट और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र और राज्यों की साझा लड़ाई का मुद्दा गर्म हो गया है।
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कांग्रेस और केंद्र सरकार को उम्मीद है कि यूपीए के साथ जद(यू) के बदलते रिश्ते और बोध गया के विस्फोट के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब आतंकवाद के खिलाफ एनसीटीसी के गठन के प्रति अपना रुख बदल सकते हैं।
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गौरतलब है कि गैर यूपीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के मुखर विरोध के कारण ही केंद्र सरकार एनसीटीसी के गठन को अंजाम नहीं दे सकी।
खुद नीतीश ने इसी साल पांच जून को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर एनसीटीसी को लेकर अपनी चिंताएं प्रकट की थी।
गृह मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि यूपीए सरकार और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने जब आतंकवाद के खिलाफ केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, सूचनाओं की साझेदारी, संसाधनों के उपयोग आदि के लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र (एनसीटीसी) बनाने की जो पहल की थी, उसे उन राज्यों की सरकारों ने ही पंक्चर किया जो इस समय आतंकवाद को लेकर सबसे ज्यादा केंद्र पर निशाना साध रही हैं।
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मुख्यमंत्रियों की बैठक से लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह ने एनसीटीसी का विरोध किया।
इन मुख्यमंत्रियों का तर्क था कि एनसीटीसी का गठन करके केंद्र सरकार जिस तरह राज्यों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आईबी के जरिए सीधी कार्रवाई करने का अधिकार ले लेगी, उससे देश के संघीय ढांचे को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
संघीय ढांचे के नाम पर इन सभी गैर यूपीए शासित राज्यों ने एनसीटीसी का जमकर विरोध किया। हालाकि राज्यों के विरोध के बाद केंद्र ने एनसीटीसी के प्रारूप में कुछ जरूरी संशोधन करकेयह भरोसा दिया कि आतंकवाद के खिलाफ जो भी कार्रवाई की जाएगी वह राज्यों को भरोसे में लेकर की जाएगी और आईबी राज्य पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी।
लेकिन इसके बावजूद इन राज्य सरकारों का रुख एनसीटीसी को लेकर नरम नहीं हुआ है। गृह मंत्रालय को उम्मीद है कि बदली हुई परिस्थितियों में नीतीश के रुख के नरम होने की संभावना है।