नीतीश ने खेला बड़ा दांव, मुलायम को होगा नुकसान?
बिहार की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन बनाने की नींव रख दी है। नीतीश कुमार राष्ट्रीय लोक दल के साथ मिलकर संसद सत्र के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महारैली कर सकते हैं। इस रैली में बिहार के मुख्यमंत्री महागठबंधन का एलान कर सकते हैं।
नीतीश ने अजीत सिंह ही नहीं बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी इस संबंध में मुलाकात की है। जदयू और रालोद के बीच गठबंधन को लेकर सहमति बन गई है जबकि कांग्रेस के साथ गठबंधनकरने को लेकर निर्णायक बातचीत होना बाकी है।
जदयू का कहना है कि महागठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे राज्य में होगा। वहीं जदयू का पूरा जोर बिहार से जुड़े उत्तर प्रदेश के कई जिलों पर होगी।
मुलायम को हो सकता नुकसान
सोमवार को जदयू अध्यक्ष शरद यादव के निवास पर पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान नीतीश ने अजीत सिंह से अलग से एक घंटे बातचीत की थी। दोनों दलों में गठबंधन करने को लेकर सहमति बनी है। साथ ही कांग्रेस को भी इसमें शामिल करने की बात हुई है।
जदयू के महासचिव के सी त्यागी ने अमर उजाला को कहा, हां नीतीश जी और चौधरी अजीत सिंह के बीच सौहादपूर्ण मुलाकात हुई है। हम लोग लोकदल और जनता दल में साथ साथ रहे हैं। हमें अजीत सिंह के साथ जाने में कोई दिक्कत नहीं है। हम लोग इकट्ठे होकर उत्तर प्रदेश की जनता खासकर किसानों की समस्यओं को सुलझा सकते हैं।
कांग्रेस को भी इस गठबंधन में शामिल करने के मुद्दे पर त्यागी ने कहा कि रालोद के साथ कांग्रेस के संबंध अच्छे रहे हैं इसलिए हमें लगता है कि बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी एक नया मोर्चा खड़ा किया जा सकता है। नीतीश कुमार ने जनता दल युनाइटेड के महासचिव के सी त्यागी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रैली करने का आयोजन दिया है।
जनता दल युनाइटेड की पूरी रणनीति भाजपा को उत्तर प्रदेश में झटका देने की है। जदयू के सूत्रों का कहना है कि रालोद को अगर जदयू का साथ मिलता है तो चौधरी अजीत सिंह का खोया जाट वोट बैंक वापस मिल सकता है। जाट आरक्षण और गन्ना किसानों की बदहाली को लेकर जाट जाति के लोग भाजपा से नाराज है।
इसलिए समाजवादी पार्टी से ज्यादा भाजपा को नुकसान पहुंचना नीतीश कुमार का पहला मकसद है। सपा को इस महागठबंधन में शामिल करने को लेकर फिलहाल जनता दल युनाइटेड परहेज कर रहा है।