जीतन राम माझी बने बिहार के नए मुख्यमंत्री
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जीतन राम मांझी बिहार के नए मुख्यमंत्री बने। माझी ने मंगलवार को 17 मंत्रियों के साथ बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले मंगलवार को उन्हें जदयू विधायक दल का नया नेता चुना गया था।
जीतन राम अब बिहार के 23वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। मांझी ने गया से लोकसभा चुनाव लड़ा था, हलांकि वे हार गए थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। 2005 में नीतीश कुमार की पहली सरकार बनी थी, तब उन्हें मंत्री भी बनाया गया था।
हालांकि शिक्षा विभाग के घोटाले में नाम आने के कारण उन्हें पद से हटा दिया गया। बाद में वे इस मामले में बरी कर दिए गए, जिसके बाद उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया। जीतन की उम्र 70 साल है।
'नीतीश का इस्तीफा देश और पार्टी के हित में'
जदयू अध्यक्ष शरद यादव के सोमवार वाले बयान के बाद नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर पानी फिर गया था।
सोमवार को नीतीश ने अपना इस्तीफा वापस लेने से इनकार कर दिया है। पटना में जदयू विधायकों की सोमवार को हुई बैठक में नया नेता चुना जा सका। विधायकों ने नया नेता चुनने की जिम्मेदारी नीतीश को सौंपी थी और नीतीश्ा ने जीतन राम मांझी को जदयू का नया नेता नामित किया था।
रविवार को जदयू विधायकों की बैठक में नीतीश कुमार को ही नेता चुना गया था, जबकि उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
भाजपा अध्यक्ष ने दी माझी को बधाई
माझी के शपथ लेने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बधाई दी है।
बिहार के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले जीतन राम अभी तक नीतीश सरकार में एससी-एसटी वेलफेयर मंत्रील के रूप में काम कर रहे थे।
जीतन राम को महादलित कैटगरी से आने वाला माना जा रहा है क्योंकि वह मुशाहर समुदाय से आते हैं।
नीतीश को किनारे लगाने के फिराक में श्ारद?
रविवार को नीतीश के समर्थन में विधायकों ने भारी हंगामा किया था। वहीं, राजद सुप्रीमो लालू यादव ने साफ किया है कि उनकी जदयू नेताओं से कोई बातचीत नहीं चल रही है।
माना जा रहा है शरद यादव ने लालू की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाकर नीतीश को किनारे कर भाजपा और खासकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ समाजवादी ताकतों को एकजुट करने की योजना बनाई थी। हालांकि लालू की इनकार और नीतीश के दोबारा नेता चुने जाने के बाद योजना पर पानी फिर गया था।
नीतीश के विरोध के कारण शरद को कार्यकर्ताओं के विरोध का भी सामना करना पड़ा। रविवार को विधायक दल की बैठक में शामिल होने जा रहे शरद को सीएम आवास के सामने जदयू कार्यकर्ताओं ने घेर लिया और उनके विरोध में जमकर नारेबाजी की थी।
विधायकों के निशाने पर रहे शरद यादव
इससे पहले विधायक दल का नेता चुनने के लिए हुई बैठक में विधायकों ने शरद को ही निशाने पर रखा। विधायकों ने बैठक में उनकी उपस्थिति पर सवाल उठाया। जदयू के एक बाहुबली विधायक ने उनकी कड़ी आलोचना की।
शरद के भाषण के दौरान भी टोका-टाका जारी रही। कई विधायकों ने तो चुनाव में हार के लिए उनसे अध्यक्ष पद छोड़ने तक की मांग रख दी।
बैठक से पहले शरद यादव के इस बयान से विवाद खड़ा हुआ था कि नीतीश दोबारा सीएम नहीं बनेंगे। बाहर से समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक दुलाल चंद गोस्वामी ने बताया कि बैठक में एक भी नेता ने नीतीश के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा।