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चुनाव के बाद का खेल खेल रहे हैं नीतीश

Sun, 14 Apr 2013 01:15 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Sun, 14 Apr 2013 01:15 AM IST
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nitish kumar playing game of after election

भाजपा से ‘दोस्ती’ और नरेंद्र मोदी से ‘दुश्मनी’ की रणनीति अपना रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वास्तव में लोकसभा चुनाव के बाद का सियासी खेल खेल रहे हैं।

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जदयू जो तेवर दिखा रहा है, उससे साफ है कि नीतीश अब तीसरे विकल्प की ओर भी देखने लगे हैं।

जदयू में साफ हो गया है कि शरद यादव अब पार्टी के राष्ट्रीय चेहरा भर हैं और असली कमान नीतीश के हाथ में है। इसलिए मोदी को लेकर पार्टी की कार्यकारिणी उसी लाइन पर चलती दिखी, जो नीतीश चाहते रहे हैं। माना जा रहा है नीतीश सभी विकल्प खुले रखना चाहते है।
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जदयू भी उम्मीद पालने लगा है कि यह विकल्प नीतीश को पीएम पद तक भी पहुंचा सकता है। भाजपा के साथ रहकर भी जदयू पिछले नौ साल से सत्ता से बाहर है, वह भी तब जब उसके 20 सांसद हैं और मात्र नौ सांसदों वाली एनसीपी सत्ता सुख उठा रही है।
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यह तय माना जा रहा है कि केंद्र की अगली सरकार में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस व नवीन पटनायक के बीजू जनतादल की भी खास भूमिका रहेगी। ममता से मोदी की खास दोस्ती है, इसीलिए भी नीतीश अब भाजपा को आंख दिखा रहे हैं।

दूसरी ओर भाजपा का मानना है कि जदयू से गठबंधन टूटने पर बिहार में दोनों को ही नुकसान होगा। इसलिए भाजपा फिलहाल तो जदयू को लेकर आश्वस्त है, लेकिन मामला बिगड़ने पर भी बिहार सरकार से अभी बाहर होने से बचेगी।

भाजपा के एक नेता का कहना था कि मोदी को लेकर नीतीश इसलिए भी दूरी बना रहे हैं कि उन्हें भय है कि जिस तरह से गुजरात में जदयू को मोदी ने हाशिए पर फेंक दिया, कहीं बिहार में भी वही स्थिति पैदा न हो जाए। जबकि मोदी का विरोध कर नीतीश कम से कम अल्पसंख्यक वोटों को अपने पाले में रख सकते हैं।


यह भी साफ है कि भाजपा अभी मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने जा रही है, ऐसे में नीतीश कोई भी राग अलापे भाजपा उन्हें गठबंधन से अलग होने का बहाना नहीं देगी।

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