नीतीश बने विधायक दल के नेता, मांझी पर जड़े आरोप
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बिहार की राजनीति नाटकीय मोड़ पर आ गई है। जनता दल यूनाईटेड के विधायकों की बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया है, जबकि मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने के साथ ही कैबिनेट के पन्द्रह मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश की है।
शनिवार को कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव रखा गया। मांझी के समर्थक 7 मंत्रियों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि 21 मंत्रियों ने प्रस्ताव का विरोध किया और बैठक से उठ कर चले गए। इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मांझी ने इनमें से पन्द्रह मंत्रियों को हटाने की सिफारिश राज्यपाल से कर दी है।
जबकि इससे पूर्व शुक्रवार को मांझी ने अपनी कैबिनेट के दो मंत्रियों पीके शाही और राजीव रंजन सिंह लल्लन को हटाने को सिफारिश की थी। दोनों मंत्रियों को नीतीश कुमार का समर्थक माना जाता है। राज्यपाल ने दोनों मंत्रियों को हटाने की सिफारिश मान ली है। हालांकि मांझी की सिफारिश न मानने की अपील नीतीश और शरद यादव ने राज्यपाल से की थी।
राज्यपाल के पाले गेंद
विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने के कुछ देर बाद ही जदयू की विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया। नीतीश बिहार में नई सरकार का दावा पेश करेंगे।
हालांकि विधानसभा भंग करने अथवा नीतीश को नई सरकार बनाने का मौका देने का फैसला राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को करना है। ऐसे में अब सारा दारोमदार राज्यपाल पर आ गया है। माना जा रहा है कि भाजपा मांझी का समर्थन कर सकती है और उनकी कुर्सी बची रह सकती है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनावों हार के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और उन्होंने ही जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था। माना जा रहा था की नीतीश ने महादलितो के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए मांझी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुना था।
विधायक दल का नेता चुने जाने पर यह बोले नीतीश
जेडीयू विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया को संबोधित कर पार्टी का पक्ष रखा। कहा कि उन्हें लगातार मांझी के खिलाफ शिकायतें मिल रहीं थीं।
लोकसभा चुनावों में निराशाजनक नतीजों के बाद सभी की मर्जी के खिलाफ मैंने मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन उनकी कार्यप्रणाली से समस्या आ रही थी। उनके कामकाज को लेकर लोग मुझसे शिकायत कर रहे थे।
वहीं उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए राज्यसभा के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान भी हमें हराने का प्रयास किया गया। लेकिन हमने उनके मंसूबे सफल नहीं होने दिए। नीतीश ने कहा कि मैं बिहार की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनके अधिकारों पर किसी तरह की आंच नहीं आने दी जाएगी।