गैरभाजपा राजनीति की धुरी बनना चाहते हैं बिहार के मुख्यमंत्री
इस साल बिहार में धमाकेदार जीत दर्ज कर अचानक राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष की सियासत का केंद्र बने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी से साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इस क्रम में फिलहाल उनकी निगाहें अगले दो साल में होने वाले विधानसभा चुनावों पर हैं। उनकी योजना गैरभाजपा राजनीति की धुरी बनने की है।
इसके लिए वह गैरभाजपा-गैरकांग्रेस दलों के नेताओं को ही नहीं बल्कि कांग्रेस को भी साधे रखना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को रालोद के साथ लाने और असम में बदरुद्दीन अजमल को कांग्रेस से जोड़ने की उनकी कोशिश को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जदयू के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नीतीश पटेल आंदोलन के कारण अचानक चर्चा में आए हार्दिक पटेल की नई राजनीतिक भूमिका तय कर सकते हैं। दिल्ली की भविष्य की राह को मजबूत बनाने के लिए नीतीश क्षेत्रीय दलों के अलग-अलग क्षत्रपों से संबंधों को मजबूती देने की कोशिश में भी हैं।
केजरीवाल, अजीत, ममता, अजमल और कांग्रेस को साधने की योजना
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनका तालमेल जगजाहिर है। उनकी भविष्य की योजनाओं में तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों जयललिता, चंद्रबाबू नायडू और के. चंद्रशेखर राव से बेहतर तालमेल बैठाने का है।
जनता परिवार का एका कराने की मुहिम से जुड़े जदयू के रणनीतिकारों का मानना है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में गैरभाजपा-गैरकांग्रेस राजनीति नहीं चलने वाली। चूंकि कांग्रेस बहुत कमजोर हो गई है, इसलिए पूरी संभावना भाजपा और गैरभाजपा राजनीति की है।
नीतीश गैरभाजपा संभावनाओं के मद्देनजर अभी से रणनीति का तानाबाना बुनने में जुटे हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों नीतीश ने अजीत सिंह से बात कर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, जदयू और रालोद के एक साथ आने और भविष्य में कुछ और दलों को इसमें जोड़ने की संभावनाओं पर बातचीत की।
गैरभाजपा रणनीति के तहत नीतीश असम में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच गठबंधन कराने की कोशिशों में जुटे हैं।
रणनीतिकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में गैरभाजपा दलों की जीत और उसमें नीतीश की भूमिका न केवल भविष्य में गैरभाजपा राजनीति की संभावनाओं को मजबूत बनाएगी, बल्कि गैरभाजपा राजनीति में नीतीश का कद भी मजबूत करेगी।