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अधिकार रैली में केंद्र पर गरजे नीतीश
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2013 01:55 AM IST
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को अपने राज्य को विशेष दर्जा दिलाने की लड़ाई दिल्ली के दरवाजे पर ले आए।
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यहां रामलीला मैदान में आयोजित ‘अधिकार रैली’ में उन्होंने केंद्र सरकार से साफ शब्दों में कहा कि बिहार को आप या तो अभी विशेष राज्य का दर्जा दें, नहीं तो हर हाल में यह 2014 में देना ही होगा।
उन्होंने 2014 में ‘किंग मेकर’ बनने के इरादे जाहिर करते हुए कहा कि केंद्र में अगली सरकार के गठन में वे अहम भूमिका निभाएंगे।
हालांकि उनकी पार्टी जद-यू अभी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का अंग है, लेकिन नीतीश ने साफ संकेत दिए कि बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर उन्हें पाला बदले में कोई हिचक नहीं होगी।
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अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारे राज्य के साथ भेदभाव किया जा रहा है। लेकिन अपनी तरक्की के लिए हम न दाएं देखेंगे न बाएं, हम सामने देखेंगे।
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दिल्ली में हम ऐसी सरकार चाहेंगे, जो हमारे हितों को देखे।’ उन्होंने अपनी बातों से साफ जाहिर कर दिया कि वे कांग्रेस और भाजपा से समान दूरी बना कर रखने के इच्छुक हैं। यही कारण है कि उन्होंने राज्य में अपने गठबंधन दल भाजपा को रैली में नहीं बुलाया।
उन्होंने केंद्र के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसमें विशेष राज्य के दर्जे के मापदंड बदलने की बात कही गई है। नीतीश ने कहा कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। इससे न केवल बिहार को बल्कि अन्य पिछड़े राज्यों को भी फायदा होगा।
देखें रैली की तस्वीरें
नीतीश के अनुसार समय आ गया है कि सभी पिछड़े क्षेत्रों के लोग एक हो जाएं, जिससे देश का ‘समग्र विकास’ किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र जब तक उनकी बात नहीं मानता, बिहार के लोग यह लड़ाई जारी रखेंगे।
नीतीश सोमवार को बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिंदबरम से भी मुलाकात करेंगे।
रैली में जद-यू ने एक प्रस्ताव भी पास किया गया। जिसमें कहा गया कि बजट भाषण में बिहार के लिए जो वादे किए गए थे उन्हें तत्काल पूरा किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की घोषणा के लिए सरकार से तय समयसीमा की मांग की गई है। रैली में बिहार में नीतीश सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई गईं।
कहा गया कि केंद्र के तमाम भेदभाव के बावजूद बिहार ने बीते कुछ वर्षों में जिस प्रकार तरक्की की है, वह गर्व का विषय है। रैली को जद-यू अध्यक्ष शरद यादव और बिहार के पार्टी अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी संबोधित किया।
नीतीश ने साधे निशाने
-हमने सरकार का हर दरवाजा खटखटाया। बिहारियों का दोष क्या है? क्या हमें विकास करने का अधिकार नहीं? हम भेदभाव के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।
-हम ‘इंडिया’ और ‘भारत’ का विभाजन बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमें एक रूप और बिना भेदभाव वाला ‘हिंदुस्तान’ चाहिए।
-जो दिल्ली में बैठे हैं उन्हें अब बिहारियों की ताकत को पहचान लेना चाहिए।
-अगर दूसरे राज्यों से आए लोग यहां एकजुट हो जाएं, तो फिर दिल्ली पर कौन राज करेगा?
-अभी दिल्ली में ये झांकी है, ये लोगों ने अंगड़ाई ली है, अभी पूरी लड़ाई बाकी है।
निकलेंगे मोदी के विकास मॉडल से आगे
- गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाने में जुटी भाजपा को भी नीतीश ने निशाने पर रखा। उन्होंने बिहार के विकास मॉडल की चर्चा के साथ पूरी लड़ाई को पिछड़ा राज्य बनाम विकसित राज्य बनाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, ‘हमारा राज्य देश को विकास का ‘वास्तविक मॉडल’ दिखाएगा। हम विकास के मामले में सभी को पीछे छोड़ देंगे और आगे निकल जाएंगे।’
गुजरात का नाम लिए बगैर उन्होंने बिहार के सीमित संसाधनों वाले विकास मॉडल को समावेशी विकास वाला तथा सभी वर्गों को साथ लेने वाला मॉडल बताया।
न करें ऐसी राजनीति: कांग्रेस
बिहार का हर नागरिक प्रदेश के लिए ज्यादा साधन, हितकारी नीतियां और वित्त चाहता है लेकिन विशेष दर्जा देने के नाम पर किसी को ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए।
-शकील अहमद, कांग्रेस नेता
क्या है विशेष राज्य का दर्जा?
विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में निवेशकों को खास टैक्स छूट होती है, जिससे निवेशक वहां जाते हैं। उद्योग लगाते हैं। केंद्र से योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन दिया जाता है।
1969 में गाडगिल फार्मूले पर काम करते हुए पांचवे वित्त आयोग ने सबसे पहले तीन राज्यों को उनकी कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों, पिछड़ेपन और और सामाजिक समस्याओं के कारण यह दर्जा दिया था।
समय के साथ ऐसे राज्यों की संख्या 11 जा पहुंची। देश में अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में शामिल हैं।