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नरेंद्र मोदी ने बिहार में किया दो दुश्मनों को एक

Fri, 23 May 2014 08:02 AM IST
Updated Fri, 23 May 2014 08:02 AM IST
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Nitish kumar and lalu yadav shake hands against narendra modi

संकट में सांप और चूहे की एक ही नाव पर सवारी संबंधी कहावत बिहार की राजनीति में चरितार्थ होती दिख रही है।

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आम चुनाव में मोदी लहर में करीब-करीब सूपड़ा साफ हो जाने के बाद भावी संकट को भांपते हुए राज्य में एक दूसरे के विरोध की राजनीति करने वाले दो दिग्गजों नीतीश कुमार और लालू प्रसाद ने हाथ मिला लिए हैं।

मोदी ने म‌िलाया पुराने साथ‌ियों को

Nitish kumar and lalu yadav shake hands against narendra modi

इसे जदयू अध्यक्ष शरद यादव की मोदी के विरोध में राज्य में पुराने समाजवादियों को एकजुट करने की मुहिम की ठोस शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ये दोनों दल अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव साथ मिल कर लड़ने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं।

हालांकि सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद लालू ने फिलहाल इससे इनकार किया है। राजद की नीतीश के इस्तीफे के बाद गठित मांझी सरकार को समर्थन से शुरू हुई नई दोस्ती को मजबूती देने के लिए दोनों दल राज्यसभा उपचुनाव में भी हाथ मिला सकते हैं।

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राबड़ी देवी जाएंगी राज्यसभा

Nitish kumar and lalu yadav shake hands against narendra modi

खासतौर पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की योजना इस नई दोस्ती के सहारे अपनी पत्नी राबड़ी देवी को राज्यसभा भेजने की है। राज्य में जल्द ही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं।

लोकसभा चुनाव जीतने के कारण राज्यसभा के सदस्य राजीव प्रताप रूडी, रामकृपाल यादव और रामविलास पासवान को इस्तीफा देना होगा। उपचुनाव में अगर भाजपा विरोधी दलों ने हाथ मिलाया तो उन्हें दो सीटें हासिल हो सकती हैं।

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नीतीश या शरद पहुंचेगा उच्च सदन

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माना जा रहा है कि जदयू इनमें से एक सीट राजद को नई दोस्ती के तोहफे के रूप में देगा। जबकि दूसरी सीट से खुद नीतीश या शरद या जदयू का कोई अन्य उम्मीदवार उच्च सदन पहुंचेगा।

कुछ जानकार इस समझौते को एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत बता रहे हैं तो कुछ इसे चुनाव में भाजपा के साथ गए सवर्ण वोटों के खिलाफ जदयू-राजद की महज मिश्रित लामबंदी मानते हैं।

सांप्रदाय‌िकता के नाम पर एक हुए व‌िरोधी

Nitish kumar and lalu yadav shake hands against narendra modi

पुराने जनता दल के नेताओं के बीच समझौते पर लालू का कहना है कि समन्वय की जिम्मेदारी सबकी है। मंडल वालों पर हमला हो रहा है, ऐसे में एकजुटता समय की मांग है।

वैसे हमारा सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक अनंत कुमार का कहना है कि यह राजनीति बिहार से ही शुरू हो सकती है।

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