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नीतीश ने मांगी केंद्रीय योजनाओं की 90 फीसदी राशि

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 28 Dec 2012 08:22 AM IST
nitish demands ninety percent fund of central schemes
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आर्थिक रूप से कमजोर और विकास में पिछड़े राज्यों को समृद्ध बनाने के लिए केंद्र को अपनी योजनाओं की 90 फीसदी राशि राज्यों को देनी चाहिए। यह बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में कही।
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उन्होंने राज्य की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधनों की बेहद कमी का जिक्र करते हुए एक बार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की पुरजोर वकालत की। हालांकि योजना आयोग नीतीश की इस मांग को पहले ही नामंजूर कर चुका है। उन्होंने मनरेगा राशि का भुगतान राज्य के न्यूनतम मजदूरी दर के आधार पर किए जाने का भी केंद्र से अनुरोध किया।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा
नीतीश ने आरोप लगाया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बनाये गये अंतर मंत्रालय समूह ने इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया। उन्होंने मांग की कि बिहार की विकास संबंधी कमियों को दूर करने के लिए उचित नीतिगत उपायों की समीक्षा और सुझाव के लिए विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए। कुमार ने कुछ समय पहले प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। जिसमें बताया गया था कि आखिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों मिलना चाहिए।

कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय विकास में यदि पिछड़े राज्यों को साझेदार बनाया जाए तभी त्वरित विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि पिछड़े राज्यों को संसाधनों और अच्छी नीतियों से लैस किया जाए तो विकास अधिक समावेशी होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो त्वरित अधिक समावेशी और सतत विकास का नारा केवल नारा रह जाएगा और कभी हकीकत नहीं बनेगा। कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग छह साल से उठा रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।

न्यूनतम मजदूरी दर से मनरेगा का भुगतान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में तेज विकास के लिए जरूरी है कि केंद्रीय योजनाओं की राशि का आवंटन 90 फीसदी तक किया जाए। सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि उन राज्यों को भी केंद्रीय योजनाओँ की 90 फीसदी राशि मिलनी चाहिए जो आर्थिक रुप से कमजोर और विकास के मामले में बहुत पिछड़े हुए हैं। मनरेगा का जिक्र करते हुए नीतीश ने केंद्र से मांग की राज्यों की न्यूनतम मजदूरी दर के हिसाब से इसका भुगतान होना चाहिए।

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