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नितिन गडकरी की दोबारा ताजपोशी संकट में

Sat, 27 Oct 2012 09:26 PM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Sat, 27 Oct 2012 09:26 PM IST
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Nitin Gadkari crowned again in crisis
भाजपा भले ही अभी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नितिन गडकरी के साथ खड़ी हो, लेकिन पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनकी दोबारा ताजपोशी पर अब भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेने के लिए गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा इस मसले पर मंथन करेंगे।
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सूरजकुंड सम्मेलन में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की ओर से गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई थी। दिसंबर अंत अथवा जनवरी में उनकी ताजपोशी हो जानी थी, लेकिन आरोपों में घिर जाने से भाजपा को अब उनके भविष्य पर दोबारा विचार करना होगा। गडकरी का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। संगठन चुनाव की प्रक्रिया भी दिसंबर में पूरी हो जाएगी। भाजपा के पास मात्र दो माह बचे हैं, इस अवधि में उसे गडकरी के भविष्य को लेकर फैसला करना है।
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भाजपा का एक वर्ग गडकरी को दूसरा मौका देने के खिलाफ है। चर्चा तो यहां तक है कि गडकरी के मामलों को उछालने में भाजपा के ही कुछ बड़े नेताओं का हाथ है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा की अंदरूनी राजनीति व खींचतान और तेज होगी। इसमें उन नेताओं का हाथ माना जा रहा है जो शुरू से ही गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिए जाने के खिलाफ रहे हैं।
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गडकरी के साथ भाजपा अभी इसलिए खड़ी है ताकि कांग्रेस इसका राजनीतिक फायदा न उठा पाए। भाजपा का मानना है कि गडकरी के इस्तीफे से देशभर में यह संदेश जाएगा कि उन पर लगे सभी आरोप सही हैं। इसका सीधा लाभ कांग्रेस को गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव में मिलेगा।


भाजपा को आशंका थी कि कांग्रेस यह प्रचार करती कि बंगारू लक्ष्मण की तरह भाजपा का दूसरा अध्यक्ष भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इसलिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने फिलहाल गडकरी के साथ खड़ा होने में भलाई समझी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत भी दिल्ली आने की बजाए मुंबई चले गए। उधर, गडकरी दिनभर हिमाचल में चुनाव प्रचार करते रहे और शाम को दिल्ली लौट आए।
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