'मैं मुंबई से गुजरातियों का सफाया चाहता हूं'
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महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर पहली बार विधायक बने नितेश राणे ने अपने बयान से विवाद पैदा कर दिया है।
राणे ने कहा कि वह मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ज़रिए 'गुजरातियों की साफ़-सफ़ाई करना चाहते हैं'।
उन्होंने कहा, "ट्विटर और सोशल मीडिया पर हमारे मराठी लोगों के बारे में गंदी टिप्पणियाँ रहती हैं। जो मराठी लोगों के विरुद्ध बात करने वाले गुजराती हैं, मैंने उन्हें शहर से साफ़ करने की बात की है।"
भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही राणे की अपनी पार्टी ने ही इस बयान की निंदा की है और इसे गैर ज़रूरी करार दिया है।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता संजय झा ने नितेश के बयान की निंदा की है।
उनका कहना था, ''मैंने ट्विटर पर जो देखा है उससे कह सकता हूं कि ये निंदनीय है। ये एकदम गैर-ज़रूरी बयान है। अगर नितेश को कोई चेतावनी देनी होगी तो वो राज्य और केंद्र का नेतृत्व तय करेगा।''
ट्वीट का बचाव
राणे ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा था, "स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लेना चाहता हूँ और मुंबई से शुरुआत करना चाहता हूँ। वहाँ से मराठियों से नफ़रत करने वाले सभी गुज्जुओं की हमेशा के लिए सफ़ाई कर देना चाहता हूँ।"
इस टिप्पणी पर काफी नाराज़गी फैली लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण राणे के बेटे नितेश ने अपने ट्वीट का फिर भी बचाव किया और कहा कि 'मुंबई में मराठियों को रहने की जगह नहीं मिल रही है क्योंकि वो मराठी हैं'।
उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, "अगर मुबई में मराठियों को रहने की जगह नहीं मिलेगी तो हमें सफाई अभियान शुरु करना पड़ेगा।"
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना था कि कांग्रेस के ऐसे रवैए के कारण ही पार्टी को महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाताओं ने बाहर का रास्ता दिखाया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष मानिकराव गवित ने भी राणे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और ये नितेश के निजी विचार हो सकते हैं पार्टी के नहीं।