NIA ने किया रोहिणी सालियान के दावे को खारिज
एनआईए ने सरकारी वकील रोहिणी सालियान के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2008 के मालेगांव ब्लास्ट्स के केस में उन पर यह दवाब बनाया गया कि वे इसे कमजोर कर दें।
एनआईए ने कहा है कि किसी के प्रति नरम या कड़ा रुख अख्तियार करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। हमने तीन अरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अर्जी दी है जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ी है और इस बीच हमारी जांच चल रही है।
एक प्रेस विज्ञप्ति में एनआईए ने कहा है कि किसी भी सरकारी वकील का मुख्य काम तब शुरु होता है जब जांच एजेंसी ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर देती है।
किसी ने नहीं दी रोहिणी को अनुचित सलाह
एनआईए के मुताबिक स्पेशल कोर्ट की प्रोसिडिंग में स्पेशल सरकारी वकील तभी शामिल किया जाता है जब जटिल कानूनी मामले आ जाते हैं अन्यथा एनआईए की शाखा के सरकारी वकील ही मामले की सुनवाई में शामिल होते है।
एनआईए की विज्ञप्ति में कहा गया है कि रोहिणी सालियान जिस मालेगांव केस की बात कर रही है वो अभी ट्रायल स्टेज तक नहीं पहुंचा है। एनआईए ने रोहिणी के इस दावे से भी इंकार किया है कि एजेंसी के किसी अधिकारी ने उन्हें कोई अनुचित सलाह दी है।
बतातें चलें कि मालेगांव ब्लास्ट 2008 में हुआ था। जिसमें 4 लोगों की मौत हुई थी और 79 लोग घायल हुए थे। इस मामले में मुख्य आरोपी मनोहर सिंह, साध्वी प्रज्ञा, और कर्नल पुरोहित सहित 12 लोग गिरफ्तार हुए थे।
मैं इन सबसे बाहर आ चुकी हूं
वहीं इस मामले में सरकारी वकील रोहिणी सालियान ने कहा है कि मैं एनआईए के सभी मामलों से बाहर आ चुकी हूं क्योंकि यह मेरे आत्मसम्मान और उसूलों की बात है।
2008 के ब्लास्ट्स में 4 मुस्लिमों की मौत हो गई थी, जिसका आरोप कुछ हिंदू उग्रवादियों पर हैं। एनआईए अन्य आतंकी मामलों के साथ-साथ इस मामले को भी देख रही है।
सालियान के दावों पर एनआईए के जवाब के कई घंटों बाद रोहिणी ने कहा कि मैंने इस मामले पर कोई बात चीत नहीं की है। यह एक प्रेस स्टेटमेंट है। मुझे ऐसी किसी भी चीज की कोई जानकारी नहीं है।
सभी मामलों को इससे जोड़ा जा रहा है
मुझे एनआईए की ओर से आग्रह किया गया था कि मैं कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करुं। उन्होंने कहा कि मुझ पर जो प्रश्न खड़े किए गए हैं वो मेरे निष्ठा का प्रश्न है।
अपने उसूलों के मुताबित मैं किसी भी मामले को बिल्कुल नहीं ले सकती जिस पर मैं कोई बहस नहीं कर सकती लेकिन इससे पहले मैंने बहुत से कानूनी राय दिए हैं।
उनका कहना है कि ये केवल मालेगांव केस के साथ ही नहीं हो रहा है वरन् इसी के साथ कई अन्य मामलों को भी जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कई और लगभग हर केस में मेरी राय ली है। सालियान ने कहा है कि मैं अब इन मामलों से बाहर निकल जाना चाहती हूं, जबकि मैंने एजेंसी के रुख पर प्रश्न खड़ा कर दिया है।