भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी बढ़ी, एनजीओ ने लगाई मेनका से गुहार
भारत-नेपाल सीमा पर बच्चों और महिलाओं की बढ़ती तस्करी के मामले पर तमाम गैर सरकारी संगठनों ने केंद्र को सचेत किया है।
सीमावर्ती इलाकों में काम करने वाले कुछ प्रमुख एनजीओ के प्रतिनिधियों ने पिछले हफ्ते महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से मुलाकात कर इस बारे में चिंता जाहिर की है।
उन्होंने बताया है कि भूकंप के बाद नेपाल से लड़कियों की तस्करी काफी बढ़ी है। यह तस्करी भारत के रास्ते दूसरे देशों में की जा रही है। इन संस्थाओं के अनुरोध पर मेनका ने इस मामले में दोनों देशों के सभी साझेदारों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।
नेपाल सीमा से सटे राज्यों में तस्कर गिरोहों की सक्रियता बढ़ी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मेनका गांधी ने इस मामले को काफी संजीदगी से लिया है। इसलिए पहली दफा महिलाओं और बच्चों की तस्करी के मामले पर तमाम साझेदारों के बीच उच्च स्तरीय परामर्श वार्ता होगी।
इसके लिए गृह मंत्रालय से भी सहयोग लिया जा रहा है। दरअसल, इस साल नेपाल में हुई भूकंप त्रासदी के बाद हजारों की संख्या में महिलाएं और बच्चे गुमशुदा हैं।
एनजीओ का कहना है कि तस्कर गिरोह भारत के रास्ते दूसरे देशों में इन्हें भेज रहे हैं। लेकिन इसे रोकने में दोनों देशों को छिटपुट सफलता ही मिल पा रही है। इसलिए इस मामले में आपसी तालमेल से कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
आठ हजार नेपाली महिलाएं तस्करी कर दुबई भेजी गईं
सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले सशस्त्र सीमा बल का कहना है कि भूकंप के बाद मानव तस्करी में पांच गुना इजाफा हुआ है। सीबीआई के एक अद्यतन डाटा के मुताबिक हाल के वर्षों में महिलाओं की तस्करी कर दिल्ली के रास्ते करीब आठ हजार नेपाली महिलाओं की तस्करी दुबई में की गई है और उन्हें देह व्यापार में धकेला गया है।
अधिकारी ने बताया कि इससे पहले मंत्रालय की ओर से बिहार, उत्तर प्रदेश समेत सीमावर्ती राज्य सरकारों को मानव तस्करी के मामले में सतर्क किया गया था। नेपाल से आने वाले लोगों और समूहों पर कड़ी निगरानी रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद कई घटनाएं हुई। इसलिए अब तस्करी को रोकने, इससे बचाव और तस्कर गिरोह से छूट कर आई लड़कियों और बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और उनके जीवनयापन की व्यवस्था को लेकर बातचीत की जाएगी।
बैठक में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसी, एनजीओ, रेलवे, मृह मंत्रालय, बीएसएफ, एसएसबी, राज्य सरकारे, नेपाल पुलिस के आला अधिकारी मौजूद होंगे।