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टूजीः हटाए गए वकील के खिलाफ दर्ज हो मुकदमा

Tue, 19 Feb 2013 11:15 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 19 Feb 2013 11:15 PM IST
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nexus between prosecutor and accused in 2g case

टूजी स्पेक्ट्रम मामले में अभियोजन पक्ष की रणनीति की चर्चा आरोपी से करते पकड़े गए सीबीआई के वकील के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली अर्जी सर्वोच्च अदालत में दायर की गई है। एनजीओ सीपीआईएल की ओर से दायर आवेदन में ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे में आरोपी की ओर से किए गए अभियोजन पक्ष के नुकसान की जांच भी सीवीसी से कराने की मांग की गई है।

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सर्वोच्च अदालत से एनजीओ ने सीबीआई को वकील और आरोपी के बातचीत के टेप की जांच कराने तथा केंद्र को अदालत के निर्देश पर वकील नियुक्त करने का आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है। सीपीआईएल ने ही टूजी घोटाले के खिलाफ शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की थी।
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आवेदन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट सीवीसी को इस बात की जांच करने का आदेश जारी करे कि अब तक अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे में कितना समझौता किया गया है। हाल ही में सीबीआई ने टूजी मामले से एक सरकारी वकील को हटा दिया था।
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यह कदम एक ऑडियो टेप के सामने आने के बाद उठाया गया था, क्योंकि सरकारी वकील को ऑडियो क्लिप में हाई प्रोफाइल आरोपी व यूनिटेक कंपनी के एमडी संजय चंद्रा के साथ अभियोजन पक्ष की रणनीति पर चर्चा करते पकड़ा गया था।

एनजीओ ने आवेदन में कहा है कि सर्वोच्च अदालत टीजी मामले की निगरानी कर रहा है, जिसकी स्थिति रिपोर्ट भी एजेंसी दायर करती है। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने टूजी के ट्रायल पर रोजाना सुनवाई करने के लिए विशेष अदालत गठित की थी।

साथ ही एक वरिष्ठ अधिवक्ता को विशेष अभियोजक नियुक्त किया था। इसके बाद भी सरकार की ओर से सीबीआई के वकील के तौर पर एके सिंह को नियुक्त किया गया, जो आरोपी से अभियोजन पक्ष की रणनीति पर चर्चा करते पकड़े गए।

टूजी स्पेक्ट्रम नीलामी पर केंद्र पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
देश की अन्य अदालतों में 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से जुड़े मसलों की सुनवाई न करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने स्पष्टीकरण के लिए सर्वोच्च अदालत में आवेदन दायर किया है। सरकार ने यह आवेदन आइडिया सेलुलर की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 8 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद दायर किया है।

आवेदन में सरकार ने कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट में पेश एडीशनल सॉलिसीटर जनरल ने साफ कर दिया था कि सर्वोच्च अदालत ने गत वर्ष 27 अगस्त को देश की अन्य अदालतों को इस मामले में सुनवाई न करने का आदेश दिया था।


सरकार ने अदालत से पूछा है कि आवंटन के लिए उठाए गए किसी भी मसले को क्या अन्य अदालत में चुनौती दी जा सकती है या सिर्फ सर्वोच्च अदालत ही मामले पर सुनवाई करेगा। सरकार ने यह स्पष्ट करने की मांग करते हुए अदालत से उचित आदेश जारी करने की गुजारिश की है।

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