अगले माह से शुरू होगी मैला मुक्ति यात्रा

नई दिल्ली/विजय गुप्ता Updated Sat, 27 Oct 2012 09:57 PM IST
next month will begin muddy end yatra
रक्षा, उड्डयन, सुरक्षा, उद्योग और तकनीकी क्षेत्र में बुलंदियां चूमने वाली महिलाओं के इस देश में अभी भी सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा जारी है। सामाजिक कलंक मानने के बाद भी केंद्र और राज्य इस कुप्रथा के उन्मूलन में असहाय नजर आ रहे हैं।

सभ्य समाज में इस कुरीति को खत्म करने की विवशता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले डेढ़ दशकों में इस काम में लगभग 1.50 लाख लोग और शामिल हुए हैं। मौजूदा समय में विभिन्न राज्यों में लगभग आठ लाख लोग जिसमें सर्वाधिक महिलाएं हैं, इस काम को करने के लिए मजबूर हैं।  

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि सिर पर मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए अगले महीने के अंत से मैला मुक्ति यात्रा शुरू की जा रही है जो 31 जनवरी तक चलेगी। यात्रा 18 राज्यों के 200 जिलों से होकर गुजरेगी। भोपाल से शुरू होकर यात्रा दिल्ली में समाप्त होगी। इस यात्रा में सिर पर मैला ढोने वाली महिलाओं के अलावा समाज के हर वर्ग के लोग शामिल शामिल होंगे।

जयराम ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सिर पर मैला ढोने के काम में लगभग आठ लाख लोग लगे हुए हैं। इसमें सर्वाधिक महिलाएं हैं। इसके उन्मूलन के लिए बनाया गया कानून लोगों को मैला ढोने से मुक्ति दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। लिहाजा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने पिछले मानसून सत्र में इस कुप्रथा को रोकने के लिए हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास विधेयक 2011 लोकसभा में पेश किया था।

विधेयक में लोगों को सिर पर मैला ढोने, सीवरों और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे खतरनाक कार्यों से मुक्ति दिलाने की सिफारिश की गई है। विधेयक में स्थानीय प्राधिकरण को अस्वच्छ शौचालयों का सर्वेक्षण कराने और उन्हें ध्वस्त कराने के लिए मालिकों को नोटिस जारी करने का अधिकार दिया गया है।
 
जाहिर है कि जुलाई महीने में फिल्म अभिनेता आमिर खान ने अपने एक टीवी शो सत्यमेव जयते के जरिए इस सामाजिक कुरीति का पर्दाफाश करते हुए सरकार से इसे समाप्त करने की मांग की थी। इस संबंध में आमिर ने प्रधानमंत्री और पूर्व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक से मुलाकात करके मैला ढोने वालों की दुर्दशा पर बात की थी। जिस पर प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया था कि सरकार देश से मैला ढोने की प्रथा के जल्द से जल्द उन्मूलन के लिए कार्य करेगी।

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