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IAS का एक्जाम देने वालों के लिए जरूरी खबर

Thu, 14 May 2015 08:17 AM IST
Updated Thu, 14 May 2015 08:17 AM IST
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news regarding csat exam pattern please read it

सरकार ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के विवादास्पद एप्टीट्यूड टेस्ट को खत्म करने की छात्रों के एक वर्ग की मांग को दरकिनार कर दिया है। इस वर्ष की परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी होने से पहले ही सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रारंभिक परीक्षा में एप्टीट्यूड टेस्ट जारी रहेगा। इसके साथ ही न्यूनतम 33 फीसदी क्वालिफाइंग अंक की सीमा तय कर दी गई है।

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हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि एप्टीट्यूड टेस्ट के सभी पहलुओं पर विचार के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। यह समिति समय-समय पर उठने वाले सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न, योग्यता, पाठ्यक्रम और पद्धति जैसे मुद्दों की विस्तृत जांच करेगी।
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न्यूनतम 33 फीसदी अंक लाने होंगे

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कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘सरकार जब तक समिति की सिफारिशों पर कोई फैसला नहीं करती तब तक सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट अथवा सीसैट) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में बना रहेगा और इसमें न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना आवश्यक होगा।’

इसमें कहा गया है कि ‘अंग्रेजी भाषा कॉम्प्रिहेंसन सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्न पत्र से बाहर ही रहेगा।’ इस फैसले के बाद, वर्ष 2015 की सिविल सेवा परीक्षा 2014 के ही पैटर्न पर होगी। इसमें एप्टीट्यूड से संबंधित प्रश्न द्वितीय प्रश्नपत्र का हिस्सा होंगे और अंग्रेजी के खंड के अंक ग्रेडिंग में नहीं जोड़े जाएंगे। हालांकि छात्रों को इसमें न्यूनतम 33 फीसदी अंक लाने होंगे। पूर्व में न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं थी।

बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए

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पिछले वर्ष जुलाई में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा ली जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था और छात्र सीसैट (प्रारंभिक परीक्षा में पेपर-2) में बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए थे।

छात्रों का दावा था कि पेपर-2 में आने वाले प्रश्नों के कारण ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने वाले अभ्यर्थियों को दिक्कत होती है।
 
केंद्रीय राज्य एवं कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह फैसला महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला है और इससे उम्मीदवारों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के दूर होने की उम्मीद है।

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