चीन की ये नई चाल जानकर सब रह जाएंगे हैरान
समुद्रों और अंतरिक्ष में अपनी धाक जमाने के बाद चीन ने अब उन इलाकों का रुख किया है, जो धरती में आम इंसान की पहुंच से काफी दूर हैं। चीन अब साल भर बर्फ से ढंके रहने वाले अंटार्कटिक में तेजी से अपने पांव पसार रहा है।
बर्फीले महाद्वीप में अनुसंधान में लगने वाले बजट के मामले में चीन ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को भी पीछे छोड़ दिया है। क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का बजट अब स्थिर हो चुका है। दरअसल, तेल व खनिज, बर्फीले पहाड़ों का ताजा व शुद्ध पानी व समुद्री मछलियों जैसे भरपूर प्राकृतिक संसाधनों का चीन दोहन करना चाहता है।
संसाधनों का करेगा दोहन
जैसा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी प्रशांत और कैरेबियाई द्वीपों की यात्रा के समय चीन के रणनीतिक सरोकारों के संबंध में कहा था कि ‘कुछ स्थान ऐसे हैं जो हमारी पकड़ से बाहर हैं।’ हालांकि चीन यहां के संसाधनों को दोहन करने के लिए इसकी सुरक्षा को भी अहम मान रहा है।
इसके लिए उसने ऑस्ट्रेलियाई सरकार से पांच साल का एक समझौता भी किया है। इस समझौते से चीन को ऑस्ट्रेलियाई बंदरगाह से 2000 मील दूर दक्षिण में स्थित अंटार्कटिक क्षेत्र में अपनी पहुंच बनाने में आसानी होगी।इसके तहत दक्षिणी ध्रुव रवाना होने से पहले चीन के जहाज इस बंदरगाह से ईंधन और भोजन की ले सकेंगे।
चीन का विस्तारवादी इरादा
हालांकि, चीन से पहले यहां अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की मौजूदगी है, मगर इन दोनों देशों का बजट मंदी का सामना कर रहा है। ऐसे में चीन का यहां कदम बढ़ाना उसके विस्तारवादी इरादे को ही साफ करता है।
ऑस्ट्रेलिया वैसे तो अमेरिका का रणनीतिक सहयोगी है लेकिन चीन के साथ भी उसके मजबूत आर्थिक संबंध हैं। चीन के नेशनल एग्रीकल्चर डेवलपमेंट समूह के चेयरमैन लिउ शेनली ने चाइना डेली से चर्चा में कहा, ‘चीन का लक्ष्य इस साल बीस लाख टन क्रिल मछली हासिल करना होगा, जो बाद में और बढ़ाया जाएगा।’