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नई तकनीक: 7 से 8 तीव्रता वाले भूकंप में भी नहीं होगा नुकसान

Thu, 18 Apr 2013 07:52 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 18 Apr 2013 07:52 AM IST
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New techniques will be safe goods in 7 to 8 magnitude quake

पाकिस्तान और ईरान में आए भूंकप से दिल्ली में भी महसूस किए झटके महसूस ही नहीं होते यदि आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से तैयार तकनीक उपलब्ध रहती।

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आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों और छात्रों ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से प्राप्त फंड से कीमती और घरेलू सामानों को बचाने के लिए तकनीक तैयार की है।

इस तकनीक के अंतर्गत एनर्जी डिसीपेट वॉयर, स्लाइडिंग सर्फेस और रबर पैड की तकनीक को इजाद किया गया है।

सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. वसंत मतसागर, डॉ. अयोथी रमन और पीएचडी के छात्र प्रवीन जगताप ने तीन तरह की तकनीक विकसित की है।

डॉ वंसत मतसागर ने बताया कि भूंकप के झटकों से सामान की सुरक्षा के लिए एनर्जी डिसीपेट वॉयर, स्लाइडिंग सर्फेस और रबड़ पैड की तीन तकनीक तैयार की गई है।

इनके माध्यम से रिक्टर पैमाने पर 7 से 8 तीव्रता वाले भूकंप से भी भवन व उसमें रखे समान को सुरक्षित रखा जा सकता हैं।

जहां एनर्जी डिसीपेट वॉयर तकनीक के माध्यम से कंपन केबल(वॉयर) में चला जाएगा जिससे कंपन महसूस नहीं होगा और सामान को नुकसान नहीं होगा।

वहीं स्लाइडिंग सर्फेस तकनीक के माध्यम से सामान को बचाने के लिए एक फॉल्स फ्लोर) बनाया जाए तो वह मूव होगा और जिसकी वजह से कमरे में रखे सामान पर असर नहीं होगा। रबर पैड का मैकेनिज्म थोड़ा अलग है।
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मान लीजिए किसी कंपयूर रुम में रबर पैड लगाया गया हो तो रबर एनर्जी को सोख लेगा। रबर में मौजूद लचीलापन कंपन को ऊपर नहीं आने देगा जिससे वस्तुओं पर असर कम होगा।
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एक तरह से यह तीनों तकनीक कंपन को वस्तुओं तक पहुंचने नहीं देती जिसके कारण बचाव होता है।

हर फ्लोर पर रखे गए वस्तुओं को बचाने के लिए इस तकनीक का डिजाइन अलग-अलग होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी फ्लोर व वस्तु को बचाया जा सकता है लेकिन वह इस तकनीक के डिजाइन पर ही निर्भर करेगा।


डॉ. मतसागर कहते हैं कि प्रोजेक्ट में दो साल का काम हो चुका है और अभी तैयार तकनीक के तहत विभिन्न मॉडल की टेस्टिंग पहाड़ी, रेतीली व मैदानी जमीन पर की जा रही है।

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