सिगरेट पर अभी सख्ती के मूड में नहीं सरकार
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सहमति के बावजूद सिगरेट की बिक्री और इसके इस्तेमाल पर फिलहाल सख्ती नहीं बरती जाएगी।
कानून मंत्रालय ने संविधान संशोधन से संबंधित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रस्ताव को यह कहकर लौटा दिया है कि इसमें आम जनता, राज्य सरकारों और तंबाकू उद्योग से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े लोगों की राय को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
इसके बाद ही संशोधन पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक सिगरेट के इस्तेमाल की न्यूनतम आयु सीमा बढ़ाने, खुदरा बिक्री प्रतिबंधित करने और सार्वजनिक इस्तेमाल पर जुर्माना बढ़ाने जैसी रमेश चंद्रा समिति की सिफारिशों पर जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिए जल्द ही इसे स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए हैं अहम निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस पर अपनी मंजूरी दे दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिगरेट व दूसरे तंबाकू उत्पाद (संशोधन) विधेयक, 2003 पर आम जनता की राय लेने के लिए समिति की सिफारिशों को जल्द ही मंत्रालय की वेबसाइट पर पेश किया जाएगा।
तमाम सुझावों को शामिल कर नए सिरे से प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिबंध लागू होने की संभावना बनेगी।
रमेश चंद्रा समिति ने खासतौर पर सिगरेट के इस्तेमाल के लिए न्यूनतम आयु सीमा को 18 वर्ष से बढ़ाकर 25 वर्ष करने, खुली सिगरेट की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगाने और सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट सेवन पर जुर्माना राशि तीन गुना बढ़ाने की सिफारिश की है।
समिति का कहना है कि प्रत्येक सिगरेट पर तंबाकू सेवन संबंधी चेतावनी नहीं होती है। यह महज डिब्बों पर ही नजर आती है। इसलिए खुली बिक्री पर पाबंदी लगनी चाहिए। इस प्रस्ताव से तंबाकू उद्योग नाखुश है। सरकार के सख्त रवैये से उद्योग और किसानों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।