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नए कानून को युवती का नाम नहीं देगी सरकार

Wed, 02 Jan 2013 10:12 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 02 Jan 2013 10:12 PM IST
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new law will not give name to delhi gangrape victim

केंद्र सरकार फिलहाल दुष्कर्म के खिलाफ प्रस्तावित नए कानून को गैंगरेप की शिकार युवती के नाम पर रखे जाने के पक्ष में नहीं है। सरकार ने बुधवार को साफ कर दिया कि नए कानून का नाम युवती के नाम पर रखना संभव नहीं है। उसकी दलील है कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) सहित किसी भी संवैधानिक या कानूनी प्रावधान के तहत किसी नए कानून को व्यक्ति विशेष का नाम नहीं दिया जा सकता। साथ ही इसकी कोई परंपरा भी नहीं है।

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केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के बयान से शुरू हुई बहस और युवती के परिवार की सहमति के बावजूद केंद्र फिलहाल ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है। गौरतलब है कि थरूर ने युवती की पहचान को सामने लाने और नए कानून को उसका नाम देने की वकालत की थी।
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थरूर के बयान पर पूरे देश में हो रही बहस के बीच युवती के परिवार ने भी इस पर सहमति जताई है। हालांकि सरकार के साथ ही कांग्रेस भी इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाह रही है।
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गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बात सिर्फ युवती की पहचान उजागर होने की नहीं है। उसके परिवार वालों की भी पहचान जाहिर नहीं होनी चाहिए। परिवार की सहमति पर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार को नामकरण की बहस में नहीं पड़ना चाहिए। अभी जरूरी है कि बलात्कार के खिलाफ कानून को सख्त बनाया जाए, जिससे ऐसे कुकृत्य करने वाले दरिंदों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

उधर, महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ की दलील है कि युवती के नाम पर कानून बनने की बात पर गौर किया जा सकता है लेकिन सरकार एक बार ऐसा कर देती है तो यह परंपरा बन जाएगी। फिर किसी दूसरे जघन्य अपराध के लिए भी कानून के नामकरण की बात उठेगी। तीरथ के मुताबिक ऐसी परंपरा बनाना ठीक नहीं होगा।

चार्जशीट दायर होने को लेकर संशय
वसंत विहार गैंगरेप मामले में बृहस्पतिवार को आरोप पत्र दायर किया जाएगा या नहीं, इसको लेकर अब भी संशय है। दिल्ली पुलिस आरोप पत्र का ड्राफ्ट लेकर हाईकोर्ट पहुंची मगर मुख्य न्यायाधीश के व्यस्त होने के चलते उन्हें दिखा नहीं पाई। हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था कि आरोप पत्र दायर करने से पहले उन्हें दिखाया जाए।

 
दरअसल, बुधवार को जनहित मामलों की सुनवाई की वजह से काम ज्यादा होता है। इसके अलावा साकेत कोर्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट का उद्घाटन होने के कारण सभी जज काम खत्म होते ही वहां चले गए। खबर है कि बुधवार को देर रात तक पुलिस चार्जशीट तैयार करने में जुटी रही।

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