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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पड़ेगी आरएसएस की छाप?

Tue, 29 Sep 2015 12:54 PM IST
Updated Tue, 29 Sep 2015 12:54 PM IST
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क्या आप अपने बच्चे की पढ़ाई लिखाई में मैगी,बर्गर, पिज्जा या फिर किसी अन्य तरह के जंक फूड बाधक बन रहे हैं? भारत की शिक्षा प्रणाली राष्ट्रवादी नहीं है- इसे राष्ट्रवादी बनाने के लिए आप किस तरह के सुझाव देना चाहेंगे?

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ये सवाल किसी क्विज काम्पटीशन के लिए नहीं बल्कि देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने के लिए किए जा रहे सर्वे में पूछे जा रहे हैं। गुजरात के पुनरुत्थान विद्यापीठ द्वारा किए जा रहे सर्वे के प्रश्नावली में ऐसे ही सवालों से बच्चों और उनके अभिभावकों का सामना हो रहा है।
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प्रश्नावली में पूछा गया है कि क्या देश की शिक्षा प्रणाली राष्ट्रीय हो अथवा पश्चिमी हो या फिर वैश्विक? यह प्रश्नावली केवल गुजरात ही नहीं बल्कि देश भर के सभी स्कूलों में भेजे गए हैं।
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ये है प्रश्नावली

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इस प्रश्नावली से मिले जवाबों के आधार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साल के अंत में होने वाले नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए होने वाली बहस में जानकारी प्रदान करेगा।

बीते साल नवम्बर में पुनरुत्थान विद्यापीठ ने राष्ट्रवादी शिक्षा:अवधारणा और संरचना विषयक 2 दिवसीय कांफ्रेस भी आयोजित कराई थी, जिसमे सरसंघचालक मोहन भागवत भी शरीक हुए थे। इस कांफ्रेस में भारत में इस्लामिक शासन और अंग्रेजी के प्रभाव को कम करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

पुनरुत्थान विद्यापीठ की प्रमुश इंदुमति कटदरे हैं जो संघ की महिला विंग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उन्होंने कहा The Telegraph से बीते साल हुए कांफ्रेस के बाद कहा था कि सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा पाठ्यक्रम के 'भारतीयकरण' के एजेंडे को रोके जाने की कोई संभावना नहीं है।

सरकार करेगी मदद

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इंदुमति ने ये भी कहा था कि भाजपा और हमारे संगठन की मानसिकता एक समान है। संभव है कि अन्य सरकारें हमारे इस काम में बाधक बनती लेकिन इस सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं है।

The Telegraph के मुताबिक कई स्कूलों ने इस सर्कुलर को रिसीव भी कर लिया है। मथुरा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य देवी प्रसाद चतुर्वेदी ने इस बात की पुष्टि भी की है कि उन्हें 100 फॉर्म मिले हैं।

वो जल्द ही वो जिले के शिक्षकों और प्राचार्यों की एक मीटिंग करने वाले हैं। उनका यह लक्ष्य है कि देश में राष्ट्रवादी शिक्षा प्रणाली हो।

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