{"_id":"9ad0db86-085f-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"new-course-will-improve-health-of-villagers","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रामीणों की ‘हेल्थ’ सुधारेगा नया कोर्स","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
ग्रामीणों की ‘हेल्थ’ सुधारेगा नया कोर्स
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 27 Sep 2012 10:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी की समस्या को कुछ हद तक सुलझाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की भर्ती के लिए साढ़े तीन साल का पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। ‘सामुदायिक स्वास्थ्य में बीएससी’ कोर्स को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने भी स्वीकृति दे दी है। जिला अस्पतालों की मदद से एमसीआई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य स्कूल शुरू करेगा।
सूत्रों के मुताबिक जैसे ही अभ्यर्थी ग्रेजुएशन पूरी कर लेगा, उसे ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर नियुक्त कर दिया जाएगा। यह अधिकारी डॉक्टर नहीं होंगे और न ही इन्हें मरीजों का इलाज करने की अनुमति होगी। हालांकि नर्स और जूनियर डॉक्टर से यह अधिकारी ऊपर माने जाएंगे।
स्वास्थ्य उप केंद्र में वह मरीजों का प्राथमिक स्तर पर इलाज कर सकते हैं और रोजमर्रा की बीमारियों के लिए दवाई दे सकते हैं, जिसके लिए अभी ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। एमसीआई सूत्रों ने कहा, ‘हालांकि बीमार मरीजों को उन्हें जिला अस्पताल ही भेजना होगा।’
विज्ञापन
स्वास्थ्य सचिव पीके प्रधान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस कोर्स को मंजूरी दी गई और मंत्रालय इस प्रक्रिया की समीक्षा कर इसे 2013 से ही शुरू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में भारत में करीब साढ़े आठ लाख डॉक्टरों की कमी है और डॉक्टर-मरीज का अनुपात 1-1000 का है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक जैसे ही अभ्यर्थी ग्रेजुएशन पूरी कर लेगा, उसे ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर नियुक्त कर दिया जाएगा। यह अधिकारी डॉक्टर नहीं होंगे और न ही इन्हें मरीजों का इलाज करने की अनुमति होगी। हालांकि नर्स और जूनियर डॉक्टर से यह अधिकारी ऊपर माने जाएंगे।
विज्ञापन
स्वास्थ्य उप केंद्र में वह मरीजों का प्राथमिक स्तर पर इलाज कर सकते हैं और रोजमर्रा की बीमारियों के लिए दवाई दे सकते हैं, जिसके लिए अभी ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। एमसीआई सूत्रों ने कहा, ‘हालांकि बीमार मरीजों को उन्हें जिला अस्पताल ही भेजना होगा।’
विज्ञापन
स्वास्थ्य सचिव पीके प्रधान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस कोर्स को मंजूरी दी गई और मंत्रालय इस प्रक्रिया की समीक्षा कर इसे 2013 से ही शुरू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में भारत में करीब साढ़े आठ लाख डॉक्टरों की कमी है और डॉक्टर-मरीज का अनुपात 1-1000 का है।