मुहब्बत के प्रतीक ताज पर विवाद, गरमाई सियासत
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उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान के एक बयान से दुनिया भर में मुहब्बत के प्रतीक के तौर पर मशहूर ताजमहल पर सियासत शुरू हो गई है।
दरअसल, खान ने जहां ताजमहल को पुरातत्व विभाग से लेकर यूपी वक्फ बोर्ड के हवाले करने की मांग की है तो लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद राशिद ने ताजमहल को नमाज अता करने के लिए पूरी तरह से खोलने को कहा है।
भाजपा ने इन मांगों पर नाराजगी जाहिर करते हुए ताजमहल को सियासत से दूर रखने की नसीहत दी है। पार्टी ने कहा है कि ताजमहल परिसर में स्थित मस्जिद में शुक्रवार को पांचों वक्त की नमाज अता की जाती है। इस स्थिति में परिवर्तन का सवाल ही पैदा नहीं होता।
भाजपा ने साधा आजम पर निशाना
संस्कृति मंत्रालय ने हालांकि इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, मगर मंत्रालय के अधिकारियों का कहना था कि ताजमहल विश्व धरोहर होने के कारण पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसलिए पुरातत्व कानून के मुताबिक वहां की स्थिति में कोई बदलाव संभव नहीं है। ताजमहल को पूरी तरह से यूपी वक्फ बोर्ड को देने संबंधी मांग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बीते 13 नवंबर को लखनऊ में वक्फ बोर्ड के कई सदस्यों की बैठक में आजम और इमाम ने अपनी मांगें रखी थीं। वर्तमान व्यवस्था में ताजमहल परिसर में स्थित मस्जिद में केवल शुक्रवार को पांचों वक्त की नमाज पढ़ी जाती है।
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि आजम की अनर्गल बयान देने की फितरत रही है। वह अपने मंत्रालय पर ध्यान देने के बदले बखेड़ा खड़ा करने में ज्यादा विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि ताजमहल दुनिया भर में मुहब्बत का प्रतीक है, जहां तक नमाज की बात है तो ताजमहल के पास स्थित मस्जिद में शुक्रवार को लोग पांचों वक्त का नमाज पढ़ते ही हैं। गौरतलब है कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन भी है।