फिर उठी प्रियंका की मांग, आया नया पोस्टर
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लोकसभा चुनाव में हार के बाद से कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। लगातार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ पार्टी के नेता आवाज बुलंद करते आ रहे हैं।
इन सबके बीच एक बार फिर से कांग्रेस में प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग तेज हुई है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक इलाहाबाद में बाकायदा नए पोस्टर लगाए गए हैं।
इलाहाबाद के सिविल लाइन्स स्थित सुभाष क्रॉसिंग में लगाए इस विवादित पोस्टर में दावा किया गया है कि प्रियंका गांधी जल्द ही राजनीति में सक्रिय तौर पर उतरने वाली हैं।
राहुल गांधी से मोह-भंग
इसमें कहा गया है कि जिस तरह से बीजेपी ने अमित शाह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया है उसके मुकाबले में कांग्रेस आलाकमान प्रियंका गांधी को राजनीति में उतारने की योजना पर विचार कर रहा है।
पोस्टर से साफ है कि पार्टी कार्यकर्ताओं का राहुल गांधी से मोहभंग दिखाई दे रहा है। शायद इसीलिए उन्होंने नए पोस्टर में सोनिया गांधी के साथ प्रियंका गांधी की तस्वीर लगाई है। पोस्टर में राहुल गांधी को जगह नहीं दी गई है।
इसके साथ ही पोस्टर में नया नारा दिया गया है 'कांग्रेस का मून, प्रियंका इज कमिंग सून'। इसके साथ ही पोस्टर में यूथ कांग्रेस के नेता हसीब अहमद और शिरीष चंद्र दुबे की तस्वीरें भी हैं। इस पोस्टर में हसीब अहमद को इलाहाबाद शहर के कांग्रेस सचिव कहा गया है।
पहले भी आए हैं ऐसे पोस्टर
पोस्टर पर जब दोनों पार्टी नेताओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब प्रियंका गांधी को राजनीति में आकर 129 साल पुरानी कांग्रेस को बचाने की मुहिम संभालनी होगी। जिससे एक बार फिर से खड़ी हो सके।
इस पोस्टर वॉर से सबसे बड़ा झटका राहुल गांधी को लगा है क्योंकि सीधे तौर पर इसमें उनकी अनदेखी की गई है। ये कोई पहली बार नहीं हुआ जब इलाहाबाद में ऐसे पोस्टर लगे हों।
एक पखवाड़े में ये दूसरी बार हुआ है जब ऐसे पोस्टर लगे हों। इससे पहले भी ऐसे ही पोस्टर लगाए गए थे जिसमें नारा था, 'शाह को अगर देना है मात, प्रियंका को सौंप दो कांग्रेस का हाथ'। इसके जरिए उन्होंने साफ तौर से प्रियंका की मांग पार्टी में की थी।
पोस्टर लगाने वालों पर हो चुकी है कार्रवाई
हालांकि जिन्होंने इस बार पोस्टर लगाए हैं उन्होंने पिछले साल भी प्रियंका गांधी के समर्थन में पोस्टर लगाए थे। उस समय पार्टी ने उन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था। बाद में पार्टी ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया था।
एक बार कार्रवाई के बाद भी इलाहाबाद इकाई के इन दोनों नेताओं ने पोस्टरबाजी बंद नहीं की। वे लगातार इस कार्रवाई में जुटे रहे। इस मामले में जब कांग्रेस के आला नेताओं से पूछा गया तो उन्होंने इन नेताओं के बारे में कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया।
दूसरी ओर इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व नगर सचिव तारिक सईद अज्जू से बात की गई तो उन्होंने इस तरह की पोस्टरबाजी को घटिया पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है।