नए कैग की नियुक्ति को SC में चुनौती देगी 'आप'
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नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय के बाद कैग बनने जा रहे रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा की नियुक्ति को आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की दलील दी, जिसमें अदालत ने इस तरह की नियुक्तियों में संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने का सिद्धांत दिया था। प्रशांत ने कैग की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया।
साथ ही चेतावनी दी कि अगर सरकार शर्मा को कैग बनाती है तो उनकी नियुक्ति को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कैग विनोद राय की ईमानदारी सरकार पर भारी पड़ी थी। इनके उत्तराधिकारी के तौर पर रक्षा सचिव शर्मा का नाम सामने आया है।
मंत्रालय के अधीन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए शर्मा 2003 से 2010 के बीच सभी रक्षा सौदों से जुड़े रहे हैं।
कैग बनने के बाद इनके पास सौदों की जांच करने की जिम्मेदारी होगी। ऐसे में कैग की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाएगी।
सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कोशिश अब कैग पद पर ऐसे व्यक्ति को लाने की है, जिससे उसे परेशानी न हो।
प्रशांत ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से आरटीआई के तहत मिले जवाब का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया। इसमें बताया गया था कि कैग की नियुक्ति में राष्ट्रपति के साथ वित्त मंत्रालय व कैबिनेट सचिवालय शामिल होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अहम पद पर नियुक्ति की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है।
प्रशांत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए बताया कि ऐसी परिस्थितियों में पहले मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी गई थी कि इससे संस्थान की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
प्रशांत ने आरोप लगाया कि सरकार कैग, सीवीसी, सीआईसी, सीईसी जैसे उन पदों पर कमजोर लोगों को बैठाना चाहती है, संविधान जिन्हें सरकार पर निगाह रखने की अहम जिम्मेदारी देता है।
नई नियुक्ति के बारे में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की चुप्पी पर प्रशांत ने कहा कि कैग फिलहाल रिलायंस की केजी बेसिन का ऑडिट कर रहे हैं। अपने हितों को देखते हुए बीजेपी, सपा, बसपा जैसी सभी विपक्षी पार्टियां रिलायंस का नाम आते ही चुप हो जाती हैं।