नेपाल में बर्बादी के बीच मुस्करा उठीं 400 जिंदगियां
भूकंप के हफ्ते भर बाद नेपाल अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा है। 6200 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हो चुकी है, 14 हजार से अधिक घायल हैं। अरबों की संपत्ति नष्ट हो गई है। हालांकि बर्बादी के इन्हीं क्षणों में मुल्क में जिंदगी मुस्कुराई भी है।
काठमांडू के परोपकार अस्पताल में बीते सात दिनों में 400 बच्चे जन्म ले चुके हैं। 18 वर्षीय सर्जना गौतम ने शुक्रवार को अपनी बेटी को जन्म दिया। पिछले शनिवार नेपाल ने जब भूकंप का पहला झटका महसूस किया, उस समय वे सो रही थीं।
झटका इतना तेज था कि वह घबराकर उठीं और भागीं। वह फिसल गई, पैरों में मोच आ गई। वह तब तक दौड़ती रहीं, जब तक उन्हें ये नहीं लगा कि वे सुरक्षित हैं। उस समय वह गर्भवती थीं।
भूकंप से 1,26,000 गर्भवती महिलाएं प्रभावित
फिलहाल सर्जना परोपकार अस्पताल में भर्ती हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने बताया, 'उस दिन मेरे पति बाहर थे और मैं घर में अकेली थी। मेरे पड़ोसी भी फंस गए थे। मेरे आंखों के सामने ही एक अपार्टमेंट ढह गया।'
सर्जना ने बताया की गर्भवती होने के कारण उन्हें भागने में बहुत दिक्कत हो रही थी। पैरों में भी मोच आ गई थी। सभी ओर से केवल चीखें सुनाई दे रही थीं। सर्जना ने काठमांडू के परोपकार अस्पताल में शुक्रवार को एक बेटी को जन्म दिया। अस्पताल मे पिछले एक हफ्ते में जन्म लेने वाला ये 398वां बच्चा था।
उसी अस्पताल में 24 साल की सुष्मिता तमांग ने बेटे को जन्म दिया। सुष्मिता के पति कतर में हैं, और वह उनके लौटने का इंतजार कर रही हैं। परोपकार अस्पताल में कई सद्यः प्रसूताएं बिस्तरों पर लेटी हैं।
सभी के पास सुनाने के लिए भूकंप की कहानियां हैं। उन्हें भूकंप में बहुत कुछ गंवाया, फिर भी उनके चेहरे पर सूकुन है। अपने बच्चों को देखकर वे अक्सर मुस्कुराती देती हैं।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक, नेपाल में भूकंप से तकरीबन 1,26,000 गर्भवती महिलाएं प्रभावित हुई थीं।