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'कभी नहीं कहा कि ताजमहल का निर्माण एक मंदिर के ऊपर हुआ है'

Sun, 24 Jan 2016 10:27 AM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 10:27 AM IST
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Never said Taj Mahal was built on temple ruins: Archaeologist KK Mohammed

देश के जाने माने पुरात्त्वविद केके मोहम्मद उस वक्त विवादों में घिर गए जब एक समाचार पोर्टल ने उनके हवाले (अपुष्ट) से यह खबर छापी कि ताजमहल और कुतुब मीनार का निर्माण मंदिर के अवशेषों के ऊपर हुआ है।

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इस खबर के सामने आते ही इसको तेजी से लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा करने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि इसने तुरंत विवाद का रूप ले लिया। इस लेख ने उस वक्त विवादित रूप अख्तियार कर लिया जब शुक्रवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे अपने पोस्ट पर साझा किया।
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स्वामी के पोस्ट साझा करते ही हिंदू समर्थकों ने केके मोहम्मद की आलोचना शुरू कर दी। लेख को आधार बनाकर उन लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि यह इस बात का प्रमाण है कि ताज महल और कुतुब मीनार हिंदुओं के मंदिर हैं।

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पुरातत्वविद ने किया खंडन

Never said Taj Mahal was built on temple ruins: Archaeologist KK Mohammed

मोहम्मद पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ कर चुके हैं और फिलहाल वह आगा खान सांस्कृतिक ट्रस्ट से जुड़े हैं। इस खबर के सामने आते ही उन्होंने तुरंत इसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि खबर लिखने उनसे किसी तरह की बातचीत नहीं की गई थी।

मोहम्मद ने कहा कि यह खबर उनकी आत्मकथा 'न्जान एन्ना भारतीयन (मलयालम में, 'मैं एक भारतीय')' को आधार बनाकर छापी गई है। इसे पुस्तक को रविवार को ही जारी किया गया था जिसमें वामपंथ की ओर झुकाव रखने वाले उन प्रोफेसरों की आलोचना की गई जो बाबरी मस्जिद मुद्दे से जुड़े हुए थे। इनमें प्रोफेसर इरफान हबीब, रोमिला थापर, आरएस शर्मा और डीएन झा के नाम शामिल हैं।

पुरातत्व सर्वेक्षण के क्षेत्र में मोहम्मद की एक अलग पहचान है। 1980 में फतेहपुर सिकरी में अकबर के इबाबतखाने की तलाश करने वाले पुरातत्व विभाग के लोगों में इनका भी नाम शामिल था।

'ताजमहल के पास मंदिर बनवाने की हुई थी कोशिश'

Never said Taj Mahal was built on temple ruins: Archaeologist KK Mohammed

मोहम्मद ने कहा, 'अगर उन्होंने मेरी किताब पढ़ी भी है तो उन्होंने मेरे उन बातों को नजरअंदाज कर दिया जहां मैंने हिंदुत्व के नाम पर कुतुब मीनार और ताज महल पर अफवाह फैलाने वाले लोगों की निंदा की थी। हां यह सही है कि कुवत्तुल इस्लाम मस्जिद के निर्माण में मंदिर के अव शेषों का इस्तेमाल किया गया था और यह बात सभी जानते हैं। लेकिन वह कुतुब मीनार और ताज महल नहीं है।'

यह विवाद काफी लंबे समय से चलता आ रहा है कि कुतुब मीनार और ताज महल हिंदुओं के मंदिर है। या इनका निर्माण मंदिरों के ऊपर ही हुआ है। इसमें से जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वो ये है कि पहले ताज महल की जगह तेजो महालया नाक का शिव मंदिर था जिसे बाद में शाह जहान ने मकबरे में तब्दील करवा दिया। मोहम्मद ने इस दावों को भी खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि जब 2002-03 में केंद्र में भाजपा की सरकार थी उस दौरान ताजमहल के पश्चिमी छोर पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने मंदिर का निर्माण का कार्य शुरू किया था। जिसे बाद में स्थानीय प्रशासन की मदद से तोड़वा दिया गया। इसी तरह सासाराम में भी एक भाजपा सांसद ने शेर शाह सूरी के मकबरे के पास मंदिर बनवाने की कोशिश की थी। हमने पहले उन्हें इस निर्माण को रोकने की अपील की जब वे नहीं माने तो फिर हमले अदालत की मदद से उस निर्माण को बंद करवाया।

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