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नेताजी के बड़े भाई मौत की थ्योरी से थे असहमत

Sun, 24 Jan 2016 06:13 AM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 06:13 AM IST
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netaji subhash chandra bose's elder brother

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विमान हादसे में मौत की थ्योरी पर जांच कमेटी में मतभिन्नता थी। जांच समिति के सदस्य और नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस विमान हादसे की रिपोर्ट से पूरी तरह असहमत थे। उन्होंने रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं किए और रिपोर्ट संसद में पेश किए जाने से पहले ही दिल्ली छोड़कर कोलकाता चले गए।

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इससे नेताजी के जीवित होने की चर्चाओं ने और जोर पकड़ा। हालांकि, जांच समिति के दो सदस्यों ने अपनी ओर से नेताजी की मौत के बारे में कई तथ्य रिपोर्ट में शामिल किए लेकिन इस मुद्दे पर रहस्य बरकरार रहा। नेताजी से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद उनकी मौत के रहस्य के बारे में कई तथ्य उजागर हुए हैं।
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बोस ने बाद में अलग से एक रिपोर्ट में जांच समिति की रिपोर्ट से असहमति जाहिर की। बोस ने तब अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विमान हादसे में नेताजी की मौत नहीं हुई और जापान के मंदिर में रखी गई राख उनकी नहीं है। इसलिए उसे वापस नहीं लाया जाना चाहिए। इस संबंध में संसद में सदस्य नबाब सिंह चौहान ने सवाल भी किया था।
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19 दिसंबर 1956 को सरकार की ओर से लक्ष्मी एन मेनन द्वारा दिए गए उत्तर में कहा गया कि सरकार बहुमत यानी दो सदस्यों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट से सहमत है। इस तरह बोस की रिपोर्ट और उनका नोट सरकार की ओर से खारिज कर दिया गया।

बड़े भाई ने रिपोर्ट में गड़बड़ी के लिए नेहरू पर लगाया आरोप

netaji subhash chandra bose's elder brother

सुरेश चंद्र बोस ने तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने जांच समिति को गाइड किया और उसी आधार पर रिपोर्ट बनाई गई। बोस ने आरोप लगाया कि उन्हें दिल्ली में रहने के लिए उचित आवास मुहैया नहीं कराया गया और इस तरह दिल्ली छोड़ने को मजबूर किया गया। इन आरोपों को नबाब सिंह चौहान ने अपने पूरक सवाल में शामिल किया था।

नेहरू ने बोस के आवास के बारे में पहले कहा कि उन्हों कोटा हाउस में ठहराया गया था लेकिन बाद में जब उन्हें बताया कि उन्हें लोदी रोड में हटमेंट में ठहराया गया था तब उन्होंने इस जानकारी से अनभिज्ञता जाहिर की।

बाद में नेहरू और बोस के बीच पत्राचार भी हुए जो तल्ख थे। नेहरू ने बोस की भाषा पर आपत्ति जताई थी। बाद में 14 सितम्बर 1956 को बोस ने नेहरू के पत्र का जवाब देते हुए पूछा कि उनकी कौन सी बात नेहरू को समझ में नहीं आई।

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