नेताजी को युद्ध अपराधी घोषित करने के प्रमाण नहीं
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को विश्व युद्ध का अपराधी घोषित किए जाने का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। भारत सरकार की ओर से इस बाबत किए गए पत्राचार के बाद ब्रिटेन के अधिकारियों ने ऐसी किसी दस्तावेज के होने की संभावना से इनकार किया। नेताजी की मौत या उनके गायब होने के मामले की जांच के लिए बनाए गए जस्टिस मुखर्जी आयोग ने इस बारे में तहकीकात की थी।
नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किए जाने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम कर रहे आर्मी हिस्टोरिकल ब्रांच और इंपीरियल वार म्यूजियम के अधिकारियों ने भारत सरकार को सूचित किया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम किसी युद्ध अपराधी की सूची में नहीं था।
इंपीरियल वार म्यूजियम लंदन के वरिष्ठ इतिहासकार पीटर सिमकिंस ने इस बारे में भारतीय उच्चायोग के प्रथम सचिव पवन कुमार को 25 नवम्बर 1998 में लिखा कि फारेन एंड कॉमनवेल्थ आफिस में काम कर चुके निगेल जारविस ने उन्हें बताया कि नेताजी का नाम युद्ध अपराधी की सूची में नहीं पाया गया।
युद्ध अपराधी में किसी भारतीय का नाम नहीं
नेताजी भारतीय थे और उन्हें राजनीतिक व्यक्ति के रूप में देखा जाता था।
अगर उनके बारे में कोई बात होती तो उसे भारत-ब्रिटेन रिश्ते के तहत किया जा
सकता था। युद्ध अपराधी में किसी भारतीय का नाम नहीं था।
इस संदर्भ में
भारतीय उच्चायोग के काउंसलर (पॉलिटिकल) विकास स्वरूप ने भारतीय विदेश
मंत्रालय के निदेशक (सीएनवी) विजय गोखले को 29 मई 2002 को लिखे पत्र में
वार म्यूजियम के अलावा आर्मी हिस्टोरिकल ब्रांच के पत्र का भी हवाला दिया
है।
गौरतलब है कि नेताजी के विमान हादसे में मौत की थ्योरी को नकारने वाले
उनके युद्ध अपराधी घोषित किए जाने का भी तर्क देते रहे हैं।