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मोदी ने दिया भरोसा, सार्वजनिक होंगी नेताजी की खुफिया फाइल

Thu, 15 Oct 2015 08:33 AM IST
Updated Thu, 15 Oct 2015 08:33 AM IST
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Netaji's family meets PM Modi, wants mystery on death resolved

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात कर नेताजी से जुड़ी फाइलों का सार्वजनिक करने की अपील की। परिवार के सदस्यों ने मोदी से गुजारिश की कि उन सभी फाइलों को सार्वजनिक कर दिया जाए जो नेताजी से जुड़ी हैं जिससे उनके मौत की 70 साल पुराने राज से पर्दा उठ सके। परिवार के इस अपील को पीएम मोदी ने स्वीकार कर लिया है और अगले साल 23 जनवरी से इस प्रक्रिया पर काम करने की बात कही है।

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इंडिया टुडे के मुताबिक नेताजी के परिवार ने मोदी को एक जैकेट भेंट की जिसमें नेताजी की तस्वीर बनी हुई थी। इस खासतौर पर कलकत्ता के एक फैशन डिजाइनर ने तैयार किया। मोदी ने 20 अगस्त को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा था कि वह अगले महीने (अक्टूबर) में नेताजी के परिवार से जुड़े लगभग 50 सदस्यों से मिलने वाले हैं। इस मुलाकात को एक ऐतिहासिक मुलाकात बताते हुए उन्होंने कहा था, शायद इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब नेताजी के परिवार के सदस्य एक साथ प्रधानमंत्री आवास पर आयेंगे।
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'मोदी दूसरे देशों को लिखें खत'

Netaji's family meets PM Modi, wants mystery on death resolved

गौरतलब है कि नेताजी के परिवार के सदस्य चाहते हैं कि भारत सरकार के पास उनसे (नेताजी) से जुड़ी जितनी खुफिया फाइले हैं उनको सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि अगर ये फाइलें सार्वजनिक हो जाएंगी तो नेताजी के मौत से जुड़े 70 साल पुराने रहस्य से भी पर्दा उठ जाएगा।

नेताजी के परपोत चंद्र बोस ने कहा कि उनका परिवार मोदी से  यह भी अपील करेगा कि वह रूस, जापान, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों को खत लिखकर उनसे भी नेताजी से जुड़ी खुफिया फाइलों को सार्वजनिक करने को कहें। उन्होंने कहा कि नेताजी इन सभी देशों के लोगों से जुड़े हुए थे। इन देशों के पास उनसे जुड़ी कई फाइले हैं। हम अपने इस मुहिम को वैश्विक स्तर पर ले जाना चाहते हैं जिससे हमें नेताजी से जुड़े हर सुराग मिल सकें।

वहीं नेताजी के एक और परपोते अभिजीत रे ने कहा, 'हमारा मुख्य लक्ष्य भारत सरकार के पास जो भी फाइलें हैं उनकों सार्वजनिक कराना है। अगर हम अपने फाइल ही सार्वजनिक नहीं करेंगे तो हम दूसरे देशों से ऐसा करने के लिए कैसे कह सकते हैं?'

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