नेताजी से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का फैसला
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केंद्रीय सूचना आयोग ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्नी और बेटी के बारे में गोपनीय फाइलें सार्वजनिक नहीं करने के प्रधानमंत्री कार्यालय के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
पीएमओ ने चिंता जताई है कि ऐसा करने से कई देश परेशान हो सकते हैं। मुख्य सूचना आयुक्त राजीव माथुर ने अपीलकर्ता चंद्रचुर घोष की याचिका को निपटाते हुए कहा कि हम सूचना से इनकार करने के फैसले को कायम रखते हैं।
पीएमओ ने नेताजी की पत्नी और बेटी के लिखे गए पत्रों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया था। घोष ने पीएमओ के इसी फैसले को मुख्य सूचना आयुक्त के समक्ष चुनौती दी थी।
दूसरे देशों से संबंधों पर असर-पीएमओ
साल 2013 में पीएमओ ने कहा था कि इन फाइलों को सूचना के अधिकार कानून 2005 के दायरे से बाहर रखा गया है।
जिन तीन फाइलों के बारे में जानकारी मांगी गई है उनके दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाने से दूसरे देशों के साथ संबंध प्रभावित होंगे।
नेताजी की जीवनी लिख रहे घोष ने कहा कि इन फाइलों को गोपनीय रखने से इस बारे में षड्यंत्र के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी और नेताजी की शादी के बारे में भी विवाद पैदा होंगे।