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नेताजी जासूसी विवाद: बड़ा फैसला ले सकती है मोदी सरकार

Thu, 16 Apr 2015 11:55 AM IST
Updated Thu, 16 Apr 2015 11:55 AM IST
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Netaji controversy issue will be raise difficulty to Congress.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक किए जाने का रास्ता साफ हो सकता है।

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ब्रिटिश शासन के बाद आजाद भारत में भी करीब तीन दशक तक नेताजी की हुई कथित जासूसी पर जारी सियासी संग्राम के बीच सरकार ने इस मामले में कमेटी गठित कर अपना सियासी दांव चल दिया है और इस लिहाज से कांग्रेस पर फंदा कसने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई यह कमेटी बृहस्पतिवार को बैठक कर इस बात पर विचार करेगी कि ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के रहते नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की जा सकती हैं या नहीं।
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कमेटी में पीएमओ के साथ-साथ रॉ और आईबी के मुखिया को शामिल किया गया है। सरकार ने कमेटी गठित करने का फैसला बर्लिन में हुई पीएम मोदी और नेताजी के पौत्र सूर्य बोस की मुलाकात के ठीक एक दिन बाद किया है।

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मोदी सरकार ने चला सियासी दांव

Netaji controversy issue will be raise difficulty to Congress.

इस समय विदेश मंत्रालय के पास 58, पीएमओ के पास 29 और राज्य सरकारों के पास नेताजी से जुड़ी 64 गोपनीय फाइलें हैं। इनमें तत्कालीन सोवियत संघ की जासूसी संस्था केजीबी की ओर से वर्ष 1971 से 1991 तक दी गई जानकारियां भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने इससे जुड़ी सभी फाइलें पहले ही राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दिया है। जासूसी का ताजा विवाद इन्हीं फाइलों के अध्ययन के बाद शुरू हुआ है, जिसमें प्रथम पीएम जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल के दौरान नेताजी के परिवार की जासूसी की पुष्टि की गई है।

नेताजी के संबंध में नए सिरे से छिड़े विवाद को पश्चिम बंगाल के भावी विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल नेताजी से जुड़ा मुद्दा जितना भड़केगा, कांग्रेस को सूबे में उतनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बोस परिवार जस्टिस बनर्जी कमेटी की रिपोर्ट के हवाले से दावा करता रहा है कि नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में नहीं हुई थी।

नेताजी के पौत्र चंद्र बोस के मुताबिक, "पीएम मोदी ने मुझे आश्वासन जरूर दिया था, मगर कमेटी गठित करने का निर्णय इतनी जल्दी होगा, यह मैंने सोचा भी नहीं था। बहरहाल कमेटी गठित करने के लिए सरकार और पीएम को बधाई। मुझे उम्मीद है कि इससे सच्चाई सामने आएगी।"

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