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आखिर क्या हुआ जो नेताजी में अचानक बढ़ गई इनकी दिलचस्पी

Wed, 23 Sep 2015 08:40 AM IST
Updated Wed, 23 Sep 2015 08:40 AM IST
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Netaji book sales in kolkata

प. बंगाल सरकार की ओर से गोपनीय फाइलें जारी किए जाने के बाद नेताजी से संबंधित पुस्तकों की बिक्री में अचानक तेजी आई है। कोलकाता में किताबों की मशहूर गली कॉलेज स्ट्रीट में अब इन पुस्तकों की तलाश में पहुंचने वालों की संख्या बढ़ने लगी है।

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पुस्तक विक्रेताओं व प्रकाशकों का कहना है कि 11 सितंबर को मुख्यमंत्री की ओर से फाइलों को सार्वजनिक किए जाने के ऐलान के बाद से ही पाठक वर्ग का इन किताबों की तलाश में बाजार पहुंचना शुरू हो गया था।
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पाठक मोहित पाल कहते हैं कि गोपनीय फाइलों ने दशकों बाद नेताजी के बारे में नए सिरे से कौतूहल पैदा किया है। मैं नेताजी के बारे में सब कुछ जानना चाहता हूं।
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नेताजी की जीवनी की तलाश में कॉलेज स्ट्रीट पहुंची रिया पाल कहती हैं कि नेताजी का जीवन हमेशा एक रहस्यमय लोकगाथा रही है। अब गोपनीय फाइलों के सामने आने के बाद मैंने नेताजी को श्रद्धांजलि के तौर पर उनकी जीवनी को नए सिरे से पढ़ने का फैसला किया है।

रिया कहती हैं कि एक सामान्य आदमी के लिए उन तमाम फाइलों को पढ़ना संभव नहीं है। ऐसे में किताबें ही नेताजी की यादों को ताजा करने का सबसे आसान तरीका हैं।

दो किताबों की मांग सबसे ज्यादा

Netaji book sales in kolkata

‘बीते दस दिनों से नेताजी से जुड़ी पुस्तकें खरीदने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। दो किताबों की मांग सबसे ज्यादा है। नारायण सान्याल की लिखी ‘नेताजीर रहस्येर संधाने’ और अभिजीत सेन की ‘नेताजीर रहस्य संधाने’ (नेताजी के रहस्य की खोज में)। दस दिनों में इन दोनों किताबों की जितनी प्रतियां बिक चुकी हैं उतनी बीते पांच वर्षों में भी नहीं बिकी थीं।’
- सुधांशु शेखर डे (मालिक, डेज पब्लिशिंग)

‘नेताजी से संबंधित किताबें हमेशा हॉट केक की तरह बिकती रही हैं। 11 सितंबर के बाद से इनकी मांग काफी बढ़ गई है। इसे ध्यान में रखते हुए सेन ने अगले सप्ताह नेताजी पर भगतराम तलवार की लिखी एक नई किताब ‘आमि नेताजीर अंतरधानेर संगी छिलाम’ (मैं नेताजी की गुमशुदगी का साथी था) प्रकाशित करने का फैसला किया है।’

- प्रशांत सेन (मालिक, अपूर्व बुक स्टाल)

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