फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Neta ji brother had also planned rebellion by the British

नेता जी के भाई ने भी बनाई थी अंग्रेजों से विद्रोह की योजना

Tue, 22 Sep 2015 11:16 AM IST
Updated Tue, 22 Sep 2015 11:16 AM IST
विज्ञापन
Neta ji brother had also planned rebellion by the British

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस ने भी वर्ष 1941 में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई थी। जापानियों से सहायता मिलने की स्थिति में वे इसके लिए 50 हजार लोगों की फौज खड़ी करने को तैयार थे। बीते सप्ताह सार्वजनिक हुईं नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों से इस तथ्य का खुलासा हुआ है।

विज्ञापन


इन फाइलों में शरत की ओर से कोलकाता के जापानी कॉन्सुलेट में चांसलर के तौर पर तैनात किसी मिस्टर ओहता के नाम लिखे एक पत्र की प्रति है। इसमें लिखा गया है कि वे जापान को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराने के लिए एक संगठन की स्थापना कर सकते हैं।
विज्ञापन


उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान धुरी देशों के साथ ब्रिटिश सेना की अगुवाई वाले गठबंधन से लड़ रहा था। शरत ने 18 सितंबर, 1941 को उस पत्र में लिखा था, ‘10 हजार लोग तो तत्काल हथियार उठाने को तैयार हैं। धन और हथियार मिलने पर कुछ महीनों में यह तादाद बढ़ाकर 50 हजार तक पहुंचाई जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कृपया यह बताएं कि हमें वांछित हथियार और पैसे कब तक मिल सकते हैं? यह काफी अहम और आवश्यक है।’ यह पत्र पुलिस की खुफिया शाखा के हाथ लगा था जो उस समय बोस परिवार की निगरानी कर रही थी।

पत्र में किया था जिक्र

Neta ji brother had also planned rebellion by the British

शरत ने उस जापानी अधिकारी से ‘एस’ को इस बारे में एक फौरी संदेश भी भेजने का अनुरोध किया था। समझा जाता है कि यहां ‘एस’ का मतलब शरत के भाई सुभाष चंद्र बोस से है।

16 जनवरी, 1941 को अपने कोलकाता स्थित आवास से नाटकीय तरीके से नेताजी के बचकर निकलने के कोई आठ महीने बाद लिखे उक्त पत्र में पूछा गया था कि क्या आपको ‘एस’ का कोई संदेश मिला है?

कृपया मुझे तमाम अहम सूचनाएं मुहैया कराएं. मसलन यूरोप में क्या हो रहा है और क्या सर्दियों में जर्मनी ईरान की ओर बढ़ेगा? बोस ने दावा किया था कि वे जापान को गोपनीय सूचनाएं मुहैया करा सकते हैं।

उन्होंने तीन महीने के लिए प्रायोगिक तौर पर इसकी पेशकश करते हुए शुरुआती खर्चों के तौर पर पांच हजार रुपये भेजने को कहा था।

गोपनीय फाइलों से साफ है कि देश की आजादी के बाद भी शरत की गतिविधियों की जासूसी वर्ष 1950 में उनके निधन तक जारी रही। पश्चिम बंगाल सरकार ने 20 सितंबर, 1948 को शरत बोस की निगरानी जारी रखने का नया आदेश दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed