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पेशाब पीकर जिंदा रहा 82 घंटे, त्रासदी की 3 कहानियां

Fri, 01 May 2015 09:00 AM IST
Updated Fri, 01 May 2015 09:00 AM IST
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Disaster in Nepal after Earthquake; 3 stories

नेपाल में भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। 73 जिलों में से 30 जिले प्रभावित हुए हैं और इनमें से 12 जिलों की दशा बहुत दयनीय है। भूकंप में मरने या घायल होने वालों के बारे में किसी के पास कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। शहर से ज्यादा तबाही गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में हुई है। तमाम स्थानों पर राहत एवं बचाव दल भी नहीं पहुंच पाए हैं।

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इसलिए नुकसान और तबाही का आकलन करने में अभी करीब चार-पांच दिन लग सकते हैं। जबकि सही तस्वीर धीरे-धीरे सामने आएगी। तबाही काफी हुई है। रास्ते बंद हैं। सड़कें कट गई हैं। लोग अभी भी इस तबाही से बदहवासी की स्थिति में हैं। राहत एवं बचाव कार्य में संतुलन बिठाना कठिन हो रहा है।
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पढ़िए नेपाल की त्रासदी की चंद कहानियां, जो भायवह तबाही की बानगी भर हैं।

घर के 18 सदस्यों को खो दिया

Disaster in Nepal after Earthquake; 3 stories

भूकंप में शंकर प्रधान ने अपना सबकुछ खो दिया। उन्होंने बुधवार को बेटी की चिता को आग दी। उन्हें अपने परिवार के 18 सदस्यों को एक साथ इस भूकंप में गंवाना पड़ा है।

चिता में सजी अपनी बेटी के पैर और होठों को वह तीन बार पानी में डुबोते हैं ताकि उसकी आत्मा को मुक्ति मिले। बेटी की चिता पर लकड़ी सजाते प्रधान की आंखों में आंसू हैं और वह टूटे दिल से अपने परिवार को 18 सदस्यों को आखिरी विदाई दे रहे हैं।

भूकंप में उनके परिवार के 18 सदस्य मौत के मुंह में समा गए थे।

पेशाब पीकर जिंदा रहा 82 घंटे

Disaster in Nepal after Earthquake; 3 stories

नेपाल में भूकंप से ध्वस्त हुए एक होटल के दबा एक शख्स अपना ही पेशाब पीकर 82 घंटों तक मौत से जूझता रहा। आखिरकार उसकी हिम्मत काम आई और इमारत की दीवार को ठोकने की आवाज एक फ्रांसीसी राहतकर्मी ने सुन ली और उसे निकाल लिया गया। 

काठमांडू के एक होटल के एक मलबे में दबे 27 वर्षीय ऋषि खनल ने बताया कि शनिवार को दोपहर का भोजन करने के बाद जैसी ही उसने दूसरी मंजिल की ओर रुख किया इमारत भरभरा कर गिर गई।

फिर भी मैंने हिम्मत बनाए रखी और आखिरकार एक फ्रांसीसी टीम को दीवार पर धक्का मारने की आवाज सुनाई दे गई। उसने मुझे निकाला। इस दौरान बचे रहने के लिए मुझे अपना ही पेशाब पीना पड़ा।

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हाथ जोड़े हुई थीं मंदिर में लाशें

Disaster in Nepal after Earthquake; 3 stories

भूकंप ने काठमांडू की पहचान ही मिटा दी है। पांच सौ साल पुराने जिस काष्ठमंडप मंदिर पर राजधानी का नाम काठमांडू पड़ा है वह अब सिर्फ मलबे का ढेर रह गया है। भूकंप ने मंदिर में मौजूद कई लोगों को मौत की नींद सुला दी। जिस दिन भूकंप आया उस दिन कई लोग मंदिर के अंदर रक्तदान के लिए जमा हुए थे। लेकिन एक ही झटके में सारे लोग दब गए।

रक्तदान कर रहे कुछ लोगों ने बाहर भागने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। कुछ लोग यह सोच कर मंदिर के अंदर भागे थे कि अब तक कई भूकंपों को झेल चुका यह अब भी बचा ही रहेगा।

यहां राहत कार्य में लगी सुनीति तमराकर ने बताया कि मंदिर के मलबे में दबी कई नर्सों की लाशों को जब बाहर निकाला गया तो वे हाथ जोड़े थीं।

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