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मौत के मुंह से बचकर आई प्रीति ने सुनाई भूकंप की खौफनाक कहानी

Wed, 29 Apr 2015 11:05 AM IST
Updated Wed, 29 Apr 2015 11:05 AM IST
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nepal earthquake and priti

‘अचानक धरहरा हिला और मैं नीचे गिर गई, इसके बाद मुझे कुछ पता नहीं।’ यह कहना है प्रीति का। प्रीति अपनी बड़ी बहन और मां के साथ धरहरा देखने गई थी। शनिवार को जब भूकंप आया तो तीनों धरहरा के सातवें मंजिल पर थीं।

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झटके के सिवा कुछ अहसास नहीं हुआ। धरहरा भरभरा कर गिर पड़ा। नेपाल के ‘कुतुबमीनार’ माने जाने वाले दो सौ तीन फीट ऊंचे धरहरा मीनार के मलबे में दबने से शनिवार को ही 180 लोगों की मौत हो गई थी।
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खुशबू, प्रीति और उनकी मां बुढाथोकी खुशकिस्मत रहीं। मां और दोनों बेटियों का इलाज राजधानी के सिविल अस्पताल में चल रहा है। चार्टर्ड एकाउंटेंसी की छात्रा प्रीति कैसे धरहरा से नीचे कुछ पता नहीं चला। वह यह भी नहीं कैसे और किसने उसे अस्पताल पहुंचाया।
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'खुशबू काफी सहमी'

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इस प्राकृतिक आपदा में भले इन तीनों की जान बच गई लेकिन बुढ़ाथोकी के चार सगे-संबंधियों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। बैंक में काम करने वाली खुशबू काफी सहमी है।

वह कुछ भी बता नहीं पा रही है लेकिन अपनी बहन और मां को अस्पताल में साथ देखकर हैरान भी है। मां को पहले अस्पताल के अलग वार्ड में रखा गया था।

बाद में अस्पताल निदेशक डॉ विमल थापा ने सभी को एक ही वार्ड में रखवाया। प्रीति को गंभीर चोट है। ट्यूब डाला गया है। कुछ दिन और अस्पताल में ही रहना होगा। अस्पताल के निदेशक ने कहा खुशबू और मैया को अब बेहतर हैं लेकिन तीनों खतरे से बाहर हैं।

नेपाल में शनिवार की छुट्टी पर निकले थे सैर-सपाटे को

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नेपाल में शनिवार को सरकारी छुट्टी रहती है। इस दिन अधिकांश लोग घूमने निकलते हैं। काठमांडू में धरहरा सभी के आकर्षण का केंद्र था। और तो और नए वर्ष पर एमाले के अध्यक्ष केपी ओली भी धरहरा गए थे।

तब से नेपाल के लोगों का आकर्षण और बढ़ा। धरहरा का निर्माण 1832 में प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने कराया था। इस मीनार से काठमांडू को देखने का खास आनंद था।

1934 के भूकंप मे भी नौ माले का धरहरा टूट गया था। इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। धरहरा मे दो सौ 13 सीढ़ियां थीं। इसे 2005 से आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।

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