{"_id":"0d1b159032b9b9fc475009e9f7ec4ad0","slug":"nelson-mandela-no-more","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेल्सन मंडेलाः 'इस दुनिया का अकेला सूर्य' अस्त","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
नेल्सन मंडेलाः 'इस दुनिया का अकेला सूर्य' अस्त
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 06 Dec 2013 01:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विनोद कुमार शुक्ल आज के दौर के हिंदी के जानेमाने कवि और लेखक हैं। उनकी कविताओं में समाज के हर दौर का प्रतिबिंब नजर आता है। छत्तीसगढ़ में मजदूरों का संघर्ष हो या नस्लभेद के खिलाफ अफ्रीका में नेल्सन मंडेला का क्रांतिकारी संघर्ष। उनकी कविताओं ने हर पहलू को बड़ी संवेदनशीलता से छुआ है। नेल्सन मंडेला पर ये कविताएं उन्होंने उस समय लिखीं जब वो जेल में थे।
विज्ञापन
एक गुलाम देश का सूरज
एक गुलाम देश का सूरज
गुलाम ही है
गुलाम, चंद्रमा, चाँदनी
सुख दुःख भी गुलाम
हवा, हरियाली, उड़ता पक्षी
औरत और नवजात बच्चा भी
गुलाम।
नेलसन मंडेला !!
इस दुनिया का अकेला सूर्य
अभी भी स्वतंत्र नहीं है
जो तुम्हारा सूरज है
वही हमारा भी।
हिरन तेज दौड़ता है
हिरन तेज दौड़ता है
कुलाँचे भी भरता है
जैसे जंगल के सींकचों के अंदर।
पक्षी उतनी दूर नहीं जाता होगा
जितनी दूर वह जा सकता है।
हिमालय उतना ऊँचा नहीं है
वह कुछ और ऊँचा हो सकता था।
समुद्र कुछ छोटा, कुछ कम गहरा है।
एक लंबी नदी, कुछ कम लंबी है।
तारे और हो सकते थे, कम हैं।
वह एक हवा है जो सब जगह है,
सब जगह का भी एक सींकचा है।
और यह वही हवा है
न उसमें कोई जोड़ है
और न उसमें कोई गठान है।
जेल से बाहर की साँस
कोई नहीं ले रहा है
जेल में नेल्सन मंडेला है।
- विनोद कुमार शुक्ल