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नेहरू को इतिहास से हटाना चाहती है सरकार?

Sat, 15 Nov 2014 12:13 PM IST
Updated Sat, 15 Nov 2014 12:13 PM IST
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Nehru's birth anniversary and modi government.

ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र की एनडीए सरकार ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की निशानी को इतिहास के पन्नों में फीका करने की ठान ली है। इसकी शुरुआत हुई है नेहरू की 125वीं वर्षगांठ से। सरकार की ओर से दिए गए विज्ञापनों को देखें तो साफ दिखता है कि नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस से अलग करने की शुरुआत हो गई है।

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केंद्र की एनडीए सरकार ने नेहरू की 125वीं जयंती और बाल दिवस के मौके पर शुरु होने वाले कार्यक्रमों के बारे में अखबारों में जो विज्ञापन दिए हैं, उनमें जवाहर लाल नेहरू का चित्र और जिक्र करने में बेहद कंजूसी बरती गई है।
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सरकार की ओर से जारी कुछ बड़े विज्ञापनों में से सिर्फ एक विज्ञापन में ही नेहरू का बड़ा चित्र और जिक्र है, जो नेहरू की 125वीं जयंती के उद्घाटन कार्यक्रम का है।
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बाल दिवस के मौके पर शुरु होने वाले बाल स्वच्छता मिशन और बाल फिल्म मेला जैसे कार्यक्रमों के विज्ञापनों से नेहरू नदारद हैं। जबकि एक विज्ञापन में सिर्फ नेहरू का रेखाचित्र है लेकिन और कोई जिक्र नहीं है कि यह रेखाचित्र क्यों दिया गया और इस कार्यक्रम से नेहरू का क्या रिश्ता है।

विज्ञापन में नेहरू की अनदेखी

Nehru's birth anniversary and modi government.

नेहरू जन्मदिवस को ही देश भर में बाल दिवस के रूप में दशकों से मनाया जाता रहा है। यहां तक कि मोरारजी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक जितनी भी गैर कांग्रेसी सरकारें हुईं हैं, सबने इस परंपरा का पालन किया।

बाल दिवस से संबंधित दो विज्ञापनों में से एक विज्ञापन राष्ट्रीय बाल पुरस्कारों के कार्यक्रम का है, जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जारी किया है, जिसकी मंत्री जवाहर लाल नेहरू के छोटे नाती संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी हैं।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी समेत बच्चों के चित्रों से भरपूर इस विज्ञापन में नेहरू का चित्र या कोई अन्य जिक्र नदारद है।

दिल्ली सरकार ने भी बाल स्वच्छता मिशन का जो विज्ञापन जारी किया है, उसमें महात्मा गांधी का चित्र तो है, लेकिन बाल दिवस के प्रणेता नेहरू का जिक्र नहीं किया गया है।

इसके अलावा आधे पन्ने का दूसरा विज्ञापन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार ने जारी किया है। 14 से 16 नवंबर तक सीरी फोर्ट सभागार में होने वाले राष्ट्रीय बाल फिल्म मेले के उद्घाटन कार्यक्रम वाले इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के फोटो तो हैं, कोने में गांधी जी के चश्मेवाला स्वच्छ भारत का प्रतीक चिन्ह भी है। लेकिन बाल दिवस पर शुरु होने वाले बाल फिल्म मेले के इस विज्ञापन में बच्चों के चाचा नेहरू का फोटो तो दूर जिक्र तक नहीं है। जैसे बाल दिवस और नेहरू का कोई संबंध ही न हो।

आखिर क्या है मोदी सरकार की योजना?

Nehru's birth anniversary and modi government.

एक तीसरा विज्ञापन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने संयुक्त रूप से जारी किया है जो बाल स्वच्छता मिशन के उद्घाटन कार्यक्रम का है।

इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिशन का उद्घाटन कर रही मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी के साथ नेहरू का एक रेखाचित्र है। लेकिन स्वच्छ भारत के प्रतीक चिन्ह के साथ जारी इस विज्ञापन में नेहरू के रेखाचित्र के अलावा पूरे कार्यक्रम में कहीं भी नेहरू का जिक्र नहीं है। न ही यह बताया गया है कि बाल स्वच्छता मिशन का नेहरू और उनकी 125वीं जयंती से कोई संबंध है।

नेहरू की 125वीं वर्षगांठ का पूरा पूरा ज़िक्र सिर्फ एक विज्ञापन में किया गया है। यह विज्ञापन नेहरू की 125वीं जयंती वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम से संबंधित है जिसमें जवाहर लाल नेहरू के बड़े चित्र के साथ कार्यक्रम का पूरा ब्योरा है।

अखबार के आधे पन्ने के इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य अतिथि गृह मंत्री राजनाथ सिंह और संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेश शर्मा के फोटो भी हैं।

इस विज्ञापन में बाल दिवस का भी उल्लेख और इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाले भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है।

अब तक यह एनडीए का एक राजनीतिक नारा था कि देश को नेहरू-गांधी परिवार की राजनीति से मुक्त करना है लेकिन इन प्रयासों से लगता है कि एनडीए की सरकार देश के इतिहास के पन्नों पर दर्ज नेहरू के नाम को फीका करना चाहती है। चूंकि ये खबरें पहले आ चुकी हैं कि सरकार की ओर से जारी हर विज्ञापन पर प्रधानमंत्री कार्यालय की स्वीकृति की मुहर को आवश्यक बना दिया गया है, इसलिए यह यह कठिन लगता है कि यह सब शीर्ष राजनीतिक नेताओं की जानकारी या सहमति के बिना हुआ होगा।

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