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बापू पर गाए गीत को सुनकर भी फूट फूटकर रोये थे नेहरु
सुनीता कपूर/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 30 Jan 2014 11:07 AM IST
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सभी लोग जानते हैं कि 1963 में जब रामलीला मैदान में लता मंगेशकर ने ऐ मेरे वतन के लोगों...गाना गाया था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी रो पड़े थे।
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पर क्या आप जानते हैं कि मोहम्मद रफी के गाए गीत पर भी नेहरू जी फूट फूट कर रोए थे। कौन सा वो गीत था जिसे सुनकर नेहरूजी अपने पर कंट्रोल नहीं कर सके और उनकी आंखों से अविरल अश्रुधारा बह निकली।
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30 जनवरी 1948 में जैसे ही यह खबर पूरे जहां में गूंजी कि बापू अब हमारे बीच नहीं रहे। इस खबर से बॉलीवुड में भी शोक की लहर दौड़ आई।
गांधी जी को श्रद्धांजलि देने के लिए गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने तुरंत ही एक गीत लिखा और संगीतकार हुस्नलाल भगत ने गीत को संगीतबद्ध किया। दोनों ने गायक मोहम्मद रफी से वह गाना गवाया।
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बापू के पार्थिव शरीर के पास वह गीत गूंज उठा...लो सुनो ऐ दुनिया वालों बापू की यह अमर कहानी...।
जैसे ही यह गीत बजा वहां मौजूद नेहरूजी की आंखों से अविरल आंसू बहने लगे। गीत सुन कर नेहरू जी ने रफी को आमंत्रित किया।
रफी ने नेहरू के घर पर उन्हें यह गीत सुनाया। इसी साल स्वतंत्रता दिवस पर नेहरू ने रफी को रजत पदक प्रदान किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बापू के इस श्रद्धांजलि गीत को आज लोग भूल चुके हैं।
यहां तक कि महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर भी ना तो टीवी चैनल और ना ही रेडियो में ही यह गीत कभी बजते देखा-सुना जाता है।