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विश्व हृदय दिवस: दिल के मामले में लापरवाही ठीक नहीं
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sat, 29 Sep 2012 01:15 AM IST
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अव्यवस्थित जीवनशैली और असंतुलित खानपान के चलते दुनियाभर में हृदय रोग के पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों को अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खामियाजा चुकाना पड़ता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक दिल की बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है, इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं होती। महिलाओं में हृदय रोग की संभावनाएं ज्यादा होती हैं बावजूद इसके वे इस बीमारी के जोखिमों को नजरअंदाज कर देती हैं।
प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उपेंद्र कौल के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग और मधुमेह संबंधी बीमारी होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। जिसके चलते महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा हार्ट अटैक का खतरा तीन से चार गुना ज्यादा रहता है।
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उन्होंने कहा कि हमें रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए ताकि शरीर में बीमारियों को घुसने का मौका न मिल सके। बेहतर खानपान और व्यायाम से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। विश्व हृदय महासंघ के अनुसार हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। साल 2012 को महिलाओं और बच्चों में हृदय रोग की रोकथाम का वर्ष के रूप में मनाए जाने की तैयारी है।
एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और फोर्टिस वसंत कुंज के कार्यकारी निदेशक और डीन कार्डियोलॉजी डॉ. कौल ने बताया कि महिलाओं को इस बात को दिमाग से बिल्कुल निकाल देना चाहिए कि हार्ट अटैक केवल पुरुषों को ही होता है। महिलाओं की मौत के कुल मामलों में लगभग आधे हृदय रोग और उससे जुड़ी समस्याओं के होते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ के मुताबिक इस बीमारी की सिर्फ महिलाएं ही शिकार नहीं होती बल्कि कम उम्र के बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। आजकल बच्चों में जंकफूड खाने की आदत पड़ती जा रही है जो कि उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इससे न सिर्फ उनमें मोटापा बढ़ता है बल्कि कई बीमारियां भी उन्हें घेर लेती हैं।
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हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक दिल की बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है, इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं होती। महिलाओं में हृदय रोग की संभावनाएं ज्यादा होती हैं बावजूद इसके वे इस बीमारी के जोखिमों को नजरअंदाज कर देती हैं।
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प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उपेंद्र कौल के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग और मधुमेह संबंधी बीमारी होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। जिसके चलते महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा हार्ट अटैक का खतरा तीन से चार गुना ज्यादा रहता है।
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उन्होंने कहा कि हमें रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए ताकि शरीर में बीमारियों को घुसने का मौका न मिल सके। बेहतर खानपान और व्यायाम से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। विश्व हृदय महासंघ के अनुसार हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। साल 2012 को महिलाओं और बच्चों में हृदय रोग की रोकथाम का वर्ष के रूप में मनाए जाने की तैयारी है।
एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और फोर्टिस वसंत कुंज के कार्यकारी निदेशक और डीन कार्डियोलॉजी डॉ. कौल ने बताया कि महिलाओं को इस बात को दिमाग से बिल्कुल निकाल देना चाहिए कि हार्ट अटैक केवल पुरुषों को ही होता है। महिलाओं की मौत के कुल मामलों में लगभग आधे हृदय रोग और उससे जुड़ी समस्याओं के होते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ के मुताबिक इस बीमारी की सिर्फ महिलाएं ही शिकार नहीं होती बल्कि कम उम्र के बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। आजकल बच्चों में जंकफूड खाने की आदत पड़ती जा रही है जो कि उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इससे न सिर्फ उनमें मोटापा बढ़ता है बल्कि कई बीमारियां भी उन्हें घेर लेती हैं।