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सिंधुरक्षक में फंसे नौसैनिकों का बचना बेहद मुश्किल
मुंबई/नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 14 Aug 2013 09:40 PM IST
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नौसेना की आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी कई धमाकों के बाद पानी में डूब गई। सिंधुरक्षक में फंसे लोगों में अगर कोई जिंदा भी है तो उसका बचना बेहद मुश्किल है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि हादसे की ऐसी स्थिति में पनडुब्बी इंटरलॉक हो जाती है। ऐसे में अगर कोई अंदर फंसा है तो उसे पनडुब्बी को तोड़ कर ही निकाला जा सकता है।
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आशंका है कि विस्फोट के कारण पनडुब्बी में ऑक्सीजन सिस्टम भी नष्ट हो गए होंगे इस कारण लोगों के बचने के मौके बेहद कम हैं।
आगे क्या...?
दरवाजे लॉक होने के बाद अब पनडुब्बी को काटकर ही उसमें प्रवेश किया जा रास्ता है। इसमें कुछ हद तक नौसेना के गोताखोरों को सफलता तो मिली है, लेकिन बुधवार देर शाम तक वे किसी को ढूंढ नहीं पाए।
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ऐसे में सूत्रों का कहना है कि चूंकि यह पनडुब्बी रूस में बनी है, इसलिए हो सकता है कि इसे काटने के लिए रूसी विशेषज्ञों को ही बुलाना पड़े।
धमाके के बाद भयंकर आग लगी
सिंधुरक्षक पनडुब्बी अरब सागर में स्थित मुंबई के कोलाबा स्थित डॉकयार्ड में थी। मंगलवार रात करीब 12 बजे पहले इसमें एक हल्का धमाका हुआ और फिर दो जोरदार धमाके हुए, जिसके बाद भयंकर आग लग गई। इस हादसे में नौसेना के 18 लोगों के मारे जाने की आशंका है, जिसमें तीन अफसर हैं।
धमाके इतने जोरदार थे कि डॉकयार्ड के आसपास के इलाके में इमारतों की दीवारें हिल गईं। विश्व प्रसिद्ध गेटवे ऑफ इंडिया से यह आग धधकती दिख रही थी। इससे वहां मौजूद विदेशी पर्यटक भी सहम गए।
आशा की एक किरण
जानकारों के अनुसार सिंधुरक्षक में किसी के बचने की उम्मीद केवल इसी बात से है कि पनडुब्बी में अलग-अलग चैंबर्स बने होते हैं, जिन्हें इस तरह से तैयार किया जाता है कि दुर्घटना की स्थित में वे अपने आप बंद हो जाएं। इससे प्रभावित चैंबर दूसरे चेंबरों से कट जाता है।
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ऐसे में सिंधुरक्षक के जिस चैंबर में विस्फोट हुए उससे अलग चैंबर में होने वाले व्यक्ति बच सकते हैं। लेकिन तभी जबकि पनडुब्बी में ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था नष्ट न हो गई हो।
पनडुब्बी काटने में मिली सफलता
नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी के मुताबिक नौसेना के गोताखोरों ने पनडुब्बी को काटने में तो सफलता हासिल कर ली है, लेकिन बुधवार देर शाम तक वे वहां फंसे लोगों को ढूंढ नहीं पाए हैं।
बताया जा रहा है कि विस्फोटों के बाद आग इसलिए भीषण हुई क्योंकि पनडुब्बी में दर्जनों डीजल जनरेटर और बैटरियां थीं।
सिंधुरक्षक में धमाकों और भयानक आग के बाद सिंधुरत्न में मौजूद कर्मी समुद्र में कूद गए। जिसमें कुछ घायल भी हुए, जिन्हें नौसेना के अस्पताल में ले जाया गया।
नौसेना ने इस हादसे की जांच के लिए बोर्ड ऑफ इंक्वायरी का गठन किया है। हादसे के वक्त पनडुब्बी ड्यूटी पर तैनात नहीं थी।
क्या डूब रही है आईएनएस सिंधुरत्न?
नौसेना ने आधिकारिक बयान में कहा है कि सिंधुरक्षक के विस्फोट के दौरान उसके पास मौजूद पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरत्न सुरक्षित है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि विस्फोट से सिंधुरत्न को भी क्षति पहुंची है और उसके एक हिस्से में पानी भर रहा है। जिससे वह धीरे-धीरे डूब रही है। हालांकि उसे पूरी तरह डूबने से पहले बचा लिया जाएगा।
हथियारों से लैस थी पनडुब्बी
नौसेना के सूत्रों के मुताबिक हादसे के वक्त सिंधुरक्षक पनडुब्बी हथियारों से पूरी तरह लैस थी। इस पनडुब्बी से पोत रोधी ‘क्लब’ मिसाइलें भी दागी जा सकती थीं। जानकारों के अनुसार इस घटना के बाद संभवत: यह युद्ध में काम नहीं आ सकेगी।
हादसे के संभावित कारण
पनडुब्बी में किसी बैटरी के बदलने के दौरान हाइड्रोजन गैस रिलीज हुई हो, जिससे विस्फोट हुए हों।
या फिर पनडुब्बी में मिसाइल जैसे युद्धक हथियार होने से विस्फोट हुआ हो।
पहले भी लगी थी आग
16 साल पुरानी इस पनडुब्बी में 2010 में भी आग लगने की घटना हुई थी। जिसमें एक नौसैनिक की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे। यह हादसा बैटरियों में गड़बड़ी के चलते हुआ था।
नौसेना का बेड़ा
--16 पनडुब्बियां हैं नौसेना के पास। इनमें दस सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां हैं।
--1997 में नौसेना में शामिल हुई थी सिंधुरक्षक, भारत ने उसे 400 करोड़ रुपये में रूस से खरीदा था।
हम अच्छे की कामना करते हैं, लेकिन हमें बुरी खबर के लिए भी तैयार रहना होगा। चमत्कार भी होते हैं। वहां हो सकता है कि हवा मौजूद हो, लेकिन वक्त बहुत बीत चुका है।--डीके जोशी, नौसेना प्रमुख
जिन नौसैनिकों की पनडुब्बी हादसे में जान गई, मेरी पूरी सहानुभूति उनके परिवारों के साथ है।--एके एंटनी, रक्षा मंत्री