नापाक इरादे से टूटने के कगार पर पहुंची NSA वार्ता
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भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए)स्तर की वार्ता रद्द होने के कगार पर पहुंच गई है। हुर्रियत नेताओं से मिलने की नापाक हठ पर उतारू पाकिस्तान पर बेहद सख्ती दिखाते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की शर्तों पर वार्ता उसे मंजूर नहीं है।
भारत ने पाक को दो टूक कहा है कि वार्ता उफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की ओर से तय आतंकवाद और सीमा पर शांति बहाली के एजेंडे पर ही होगी।
शुक्रवार को दिन भर चले कूटनीतिक वार पलटवार के बाद देर शाम इस मामले में अपने रुख को बेहद कड़ा करते हुए भारत ने पाकिस्तान पर वार्ता की राह में अड़ंगा लगाने का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आतंकवाद के अलावा अन्य एजेंडे पर वह वार्ता की राह पर आगे नहीं बढ़ेगा।
नामुमकिन है वार्ता!
इस कड़े संदेश के साथ ही एनएसए स्तर की वार्ता की गेंद भारत ने पाकिस्तान
के पाले में डाल दी है। पाक की हठ पर भारत के तीखे रुख के बाद 23-24 अगस्त
को प्रस्तावित एनएसए स्तर की वार्ता लगभग नामुमिकन होती दिख रही है।
हुर्रियत
के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात के बहाने वार्ता को तोड़ने की पाकिस्तान
की चाल का पर्दाफाश करने के लिए इसलामाबाद में दिन भर चली दांवपेंच पर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने बेहद तल्ख बयान दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जयपुर में एक सम्मेलन में शिरकत करने गए
विकास स्वरुप ने पाक की आतंकवाद पर बातचीत में रुचि नहीं होने की पोल खोली।
जवाब देने में लगाए 22 दिन
पाकिस्तान पर वार्ता की राह में अड़ंगा डालने की हरकतों पर उन्होंने कहा
कि उसके इस रुख से भारत को हैरानी नहीं हुई है। वास्तव में उफा में दो चुने
हुए राष्ट्र प्रमुखों के बीच आतंकवाद पर वार्ता के लिए बनी सहमति के बाद
पिछले दिनों में जिस तरह के पैटर्न इसलामाबाद ने दिखाए हैं उसकी वजह से ही
हालात आज इस मोड़ पर पहुंचे हैं।
स्वरुप ने पाकिस्तान पर वार्ता के प्रति
संवेदनशीलता न अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उफा में बनी सहमति के बाद
सीमा पार से आतंकी गतिविधियां तेज कर दी गई। पाकिस्तान ने नई दिल्ली में
वार्ता की पेशकश का जवाब देने में 22 दिन लगा दिए।
इसके बाद अब पाकिस्तान
पहले से सहमति के आधार पर तय आतंकवाद और सीमा पर शांति बहाली के एजेंडे के
इतर नया एजेंडा खड़ा करना शुरू कर दिया। जबकि उसे पता है कि भारत वार्ता के
दौरान किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करेगा।
सरकार पर हावी है सेना
प्रवक्ता ने साफ
कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता में केवल दो ही पक्ष हैं और तीसरे
पक्ष यानी हुर्रियत को लाने की कोई गुंजाइश नहीं है। इस दौरान स्वरूप ने
पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार पर सेना के हावी होने का भी इशारा किया।
उन्होनें कहा कि दोनों देशों के लोग यह जानने का हक रखते हैं कि वह कौन सी
ताकतें हैं जो दो चुने हुए नेताओं के बीच बनी सहमति को ध्वस्त करना चाहते
हैं। भारत ने इसके जरिए साफ संदेश दे दिया कि वास्तव में पाक सेना और
आईएसआई पीएम नवाज शरीफ को कठपुतली बनाकर रखना चाहतीं और इन्हीं दोनों ने
हुर्रियत के बहाने वार्ता में खलल डाली है।
बहरहाल एनएसए स्तर की
वार्ता का सारा दारोमदार अब पाकिस्तान के भावी रुख पर कायम है। अगर
पाकिस्तान अब भी हुर्रियत नेताओं से मिलने की जिद पर अड़ा रहा तो विदेश
सचिव स्तर की वार्ता की तरह ही एनएसए स्तर की वार्ता का भी रद्द होना तय
है। इससे पहले भारत ने शुक्रवार सुबह पाकिस्तान को उफा में तय एजेंडे की
याद दिलाई थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हुर्रियत नेताओं से
मुलाकात उफा की भावनाओं के अनुरूप नहीं है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने
भारत पर वार्ता से पूर्व शर्तें लादने का आरोप लगाया और हुर्रियत नेताओं को
कश्मीर का असली प्रतिनिधि बताते हुए मुलाकात पर अड़े रहने की घोषणा की।
पाक की इस हठ के जवाब में ही जयपुर में सम्मेलन के बीच विशेष रुप से बाहर
आकर विकास स्वरुप ने वार्ता रद्द करने की औपचारिक घोषणा की गेंद पाक के
पाले में डाल दी।