फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   nda wants to bring mamata banerjee in his team

शरद के जरिए ममता पर डोरे डालने में जुटा एनडीए

Tue, 02 Oct 2012 01:28 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Tue, 02 Oct 2012 01:28 AM IST
विज्ञापन
nda wants to bring mamata banerjee in his team
रिटेल में एफडीआई के फैसले के विरोध में यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले चुकीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अब एनडीए डोरे डालने लगा है। सूरजकुंड सम्मेलन के बाद एनडीए प्लस की थ्योरी पर अमल करने में जुटी भाजपा की कोशिश है कि ममता के कांग्रेस के पाले में लौटने के रास्ते पूरी तरह से बंद हो जाएं।
विज्ञापन


जंतर-मंतर पर तृणमूल कांग्रेस की रैली में ममता के साथ मंच में नजर आए एनडीए के संयोजक व जदयू प्रमुख शरद यादव की उपस्थिति को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा यह भी मान रही है कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों के चलते ममता अभी एनडीए के साथ सीधे नहीं जुड़ेंगी। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 फीसदी मुसलिम मतदाता हैं। यह साफ है कि वामदलों से लड़कर सत्ता में पहुंचीं ममता खुले तौर पर भाजपा के पाले में नहीं जाएंगी। इस जमीनी हकीकत को देखते हुए भाजपा लोकसभा चुनाव के बाद के समीकरणों पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
विज्ञापन


माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत शरद यादव रिटेल में एफडीआई के फैसले के खिलाफ तृणमूल की रैली में जा पहुंचे। हालांकि भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भाजपा समेत एनडीए पहले ही कह चुका है कि भ्रष्टाचार, काले धन, महंगाई और रिटेल में एफडीआई के फैसले के खिलाफ जो भी दल या संगठन आवाज उठाएगा उसे नैतिक समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शरद यादव भी नैतिक समर्थन देने गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बहरहाल, भाजपा का मानना है कि ममता को यदि पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन बचाए रखनी है तो उसे कांग्रेस विरोधी रुख बरकरार रखना होगा। लोकसभा में ममता के 19 सांसद हैं, जबकि कांग्रेस के मात्र छह। चूंकि ममता की अगली अग्नि परीक्षा अब लोकसभा चुनाव में ही होनी है तो शायद वह अब कांग्रेस के पाले में नहीं लौटेंगी। ऐसे में भाजपा यह सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि चुनाव बाद उसे एक ‘पक्का दोस्त’ मिल जाए। इसलिए शरद यादव के जरिए ममता से निकटता बढ़ाने की कवायद शुरू की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed