शहीद हेमराज पर मोदी सरकार ने खाई बड़ी पलटी
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जब सीमा पर जवान हेमराज का सिर काटा गया था तो नरेन्द्र मोदी ने यूपीए सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बयान दिया था कि जो पाकिस्तान हमारे जवानों के सिर काट रहा है, उन्हें हमारी सरकार चिकन बिरयानी खिला रही है।
नरेन्द्र मोदी ने यह बात यूपीए सरकार का द्वारा हेमराज सिंह और सुधाकर सिंह की हत्या पर प्रतिक्रिया को देते हुए अपनी एक चुनावी रैली में कही थी। उन्होंने ये भी कहा था कि जब आतंकी कसाब को कस्टडी में रखा गया था उसे भी बिरयानी खिलाई जा रही थी।
उसी दौरान हेमराज का सिर न मिलने पर सुषमा स्वराज ने कहा था, "हम बदला लेंगे... अगर हमें हेमराज का सिर नहीं दिया जाता है तो हम उनके 10 जवानों के सिर काट देंगे।"
हेमराज की हत्या के केस में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में अब मोदी सरकार अपनी बात से पीछे हट गई है और यूपीए सरकार द्वारा दी गई कड़ी चेतावनी और उठाए गए कदमों को सही ठहराया है।
पिछली सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों को सही बताते हुए इस हलफनामे में कहा गया है कि, "15 जनवरी 2013 को उस समय देश के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि सीमा पर हमारे जवानों की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार पहले जैसा नहीं रह सकता है। जो भी इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार है उसे इसकी सजा मिलनी ही चाहिए।"
सलमान खुर्शीद के बयान भी किए गए हैं शामिल
इसमें उस समय के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा दिए गए बयान को भी शामिल किया गया है, जिसमें कहा है कि पाकिस्तान को यह नहीं सोचना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज किया जाएगा और दोनों देशों के बीच संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
इस हलफनामे में यह भी कहा गया है कि विदेश मंत्रालय के अधिवक्ता ने उस समय यह भी कहा था कि पाकिस्तान को इस संबंध में कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
आपको बता दें कि हलफनामे में एनडीए सरकार की तरफ से उठाए गए किसी प्रकार के कदम को शामिल नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ यूपीए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में ही बताया गया है।
सर्व मित्र ने दायर की थी जनहित याचिका
सरकार की तरफ से यह हलफनामा एक जनहित याचिका के तहत जारी किए गए नोटिस के बाद दिया गया है। यह जनहित याचिका सर्व मित्र नाम के एक संगठन की तरफ से दायर की गई है।
सर्व मित्र के अनुसार उस समय की सरकार ने सेना के दो जवानों की हत्या के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया था, जिसके बाद यह जनहित याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट इस याचिका की सुनवाई एक अन्य जनहित याचिका के साथ कर रही है, जिसे कारगिल में शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया के पिता ने दायर था।
सौरभ को 1999 में पाकिस्तानी सेना के जवानों ने प्रताड़ित करने के बाद मार दिया था। इस मामले में भी कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया था।