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विपक्ष के बढ़े हौंसले को रोकने के लिए एनडीए ने बनाई रणनीति

Sat, 21 Nov 2015 03:32 AM IST
Updated Sat, 21 Nov 2015 03:32 AM IST
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NDA Strategy agianst oposition

विपक्ष के बढ़े हौसले को राजग संसद में एकमत से रोकेगा। संसद में विपक्ष का एकजुटता से मुकाबला करने के लिए 24 नवंबर को राजग की बैठक बुलाई गई है।

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मानसून सत्र के धूलने के बाद सरकार की रणनीति शीत सत्र में भूमि अधिग्रहण और जीएसटी विधेयक पर संसद की मुहर लगवाने की है।

इस प्रयास में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात कर सहयोग मांगा है। बताया जा रहा है कि पुत्री के विवाह का निमंत्रण देने के बहाने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान जेटली ने इन नेताओं से विकास से जुडे विधेयकों पर समर्थन मांगा है।
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वहीं संसद की कार्यवाही सूचारू रूप से चलाने के प्रयास में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने 25 नवंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

सूत्र बताते हैं कि संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार की ओर से भी सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है। हालांकि इस बैठक की अभी तिथि तय नहीं हुई है। मगर सूत्र बताते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू इस मामले में जुटे हुए हैं।
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सरकार भी बुला सकती है सर्वदलीय बैठक

NDA Strategy agianst oposition

वैसे सरकार को इस बात का अंदेशा सता रहा है कि शीत सत्र का आलम भी मानसून सत्र सरीखा होगा। इसलिए सरकार के रणनीतिकार जीएसटी विधेयक को किसी भी सूरत में संसद से पारित कराने के मूड में हैं। सरकार को लगता है कि वर्तमान सियासी हालातों में संसद में जीएसटी की पार करा लेना बड़ी उपलब्धि होगी।

वहीं विकास की रफ्तार को पटरी पर लाने के लिए अहम भूमि अधिग्रहण बिल पर भी सरकार इस सत्र में स्थिति स्पष्ट कर देगी। इस बाबत भूमि अधिग्रहण बिल पर बनी संसद की संयुक्त समिति की बैठक 23 नवंबर को बुलाई गई है। समिति के अध्यक्ष एस एस अहलूवालिया ने समिति के सदस्यों से उपस्थित होने को कहा है।

तो विपक्ष भी भूमि अधिग्रहण पर सरकार के कदम पर नजदीकी से नजर जमाए हुए है। समिति में शामिल कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने भी अपनी अंतिम रणनीति के लिए संयुक्त समिति की बैठक से एक घंटा पहले अपनी बैठक बुलाई है।

इस मामले में कांग्रेस सरकार को कतई भी ढ़ील देने के मूड में नहीं है। हालांकि विधेयक में बदलावों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले की सरकार की स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। बावजूद उसके कांग्रेस किसी कोताही के मूड में नहीं है।

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