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बिहार चुनाव: आरक्षित सीटों पर राजग में नहीं बन पा रही बात

Sun, 09 Aug 2015 09:04 AM IST
Updated Sun, 09 Aug 2015 09:04 AM IST
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 NDA is confused on Reserved seats in bihar elections

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को महादलित के गढ़ कहे जाने वाले गया में न केवल रैली को संबोधित करेंगे, बल्कि आरक्षित सीटों को लेकर घटक दलों के बीच चल रही खींचतान को भी खत्म करने का रास्ता निकालेंगे।

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जानकारों का कहना है कि आरक्षित सीटों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ और रामविलास पासवान की लोजपा में काफी खींचतान चल रही है। देखा जाए तो बिहार में कुल 40 सीटें आरक्षित हैं।
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38 अनुसूचित जाति के लिए और दो अनुसूचित जनजाति के लिए। पिछले चुनाव में भाजपा ने 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में दलित विधायकों का सबसे बड़ा समूह भाजपा के पास ही है।
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सबकी अपनी अपनी शर्त

 NDA is confused on Reserved seats in bihar elections

भाजपा अपने इन मौजूदा विधायकों को मैदान में उतारेगी ही। अब बची 18 सीटों को लेकर राजग में मारामारी है। मांझी की पार्टी भी अपने दो मौजूदा सीटों मखदुमपुर व बाराट्टी को पक्का मान कर चल रही है।

यहां से मांझी व उनकी समधन ज्योति मांझी विधायक हैं। बची 16 सीटों पर भाजपा कम से कम चार सीट अपने उम्मीदवारों के लिए रखना चाहती है, जबकि उपेंद्र कुशवाहा भी अपने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के लिए एक आरक्षित सीट चाहते हैं।

बाकी सीटों पर मांझी और रामविलास पासवान के बीच सुलह का रास्ता नहीं निकल रहा है। खासकर इमामगंज और धरैया सीट को लेकर लोजपा वीटो लगा रही है, तो मांझी किसी भी कीमत पर यह सीट अपने पास रखना चाहते हैं।

बैठ कर निपटारा हो जाएगा?

 NDA is confused on Reserved seats in bihar elections

इन दोनों सीटों पर जदयू के उदय नारायण चौधरी व उनके भांजे मनीष कुमार विधायक हैं। लोजपा सुप्रीमो के बेटे चिराग का यह संसदीय क्षेत्र है, इसलिए पासवान यहां लोजपा का उम्मीदवार चाहते हैं।

राजापाकड से जदयू के बागी विधायक सुरेश चंचल के लिए भी एक सीट पर पेंच फंसा हुआ है। मांझी जहां अपने गढ़ गया इलाके में आरक्षित सीटों पर दावा कर रहे हैं, वहीं पूर्वांचल इलाके में भी उनका दावा पप्पू व लबली का साथ मिलने से पुख्ता हो गया है।

ऐसे में जानकारों का मानना है कि भाजपा गया रैली के बाद कोई ठोस फैसला इस मसले पर ले सकती है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा अगर मांझी की ताकत पर भरोसा करती है, तो इस मामले में वह लोजपा को आरक्षित सीटों पर ज्यादा तव्वजो नहीं देगी।

हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि मौजूदा विधायकों की संख्या ही हमारे पास तीन है। ऐसे में हम कम से कम दस सीटें चाहेंगे।

रालोसपा के नेता चंद्रभूषण ने कहा कि हम आरक्षित सीटों पर नहीं लड़ेंगे, ऐसा तो हो नहीं सकता। मेरी पार्टी में भी दलित हैं। भाजपा के संजय मयूख कहते हैं कि मामला बड़ा नहीं है। बैठ कर निपटारा हो जाएगा।

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