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देश की राजधानी में दलितों-मुस्लिमों के लिए नहीं घर

Tue, 16 Jun 2015 10:00 PM IST
Updated Tue, 16 Jun 2015 10:00 PM IST
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ncr homeowners turn away dalits and muslims

दलितों और मुसलमानों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किराए पर देने या फिर मकान बेचने में भेदभाव किया जाता है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक एक रिसर्च में यह नतीजा सामने आया है।

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यूजीसी के पूर्व चेयरमैन और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के चेयरमैन प्रोफेसर एसके थोराट, अनुराधा बनर्जी, विनोद मिश्रा और फिरदौस रिजवी की टीम ने ये रिसर्च की है। रिसर्च को ईपीडब्लू मैगजीन ने छापा है।
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रिसर्च करने वाली टीम ने एक अनोखा प्रयोग करते हुए दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुड़गांव में मकान दिलाने वाले ब्रोकर से बात की गई। इस चारों क्षेत्रों में 1,479 लोगों से बात की गई। सभी को फोन करके मकान किराए पर दिलाने और खरीदने को लेकर बात की गई। इन लोगों में ऊंची जातियों के हिंदू नाम, दलित और मुस्लिमों के नाम शामिल थे।

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31 फीसदी मुस्लिमों को मकान दिलाने से इनकार कर दिया

ncr homeowners turn away dalits and muslims

जब फोन पर बात की गई ता पता चला कि 271 सवर्ण हिंदुओं के नाम पर ब्रोकर ने मकान दिलाने की रजामंदी कर दी। वहीं लगभग 18 फीसदी दलित और 31 फीसदी मुस्लिमों को मकान दिलाने से इनकार कर दिया है।

इस रिसर्च में 198 लोगों को सीधे ब्रोकर के पास ले जाया गया। इनमें 66 सवर्ण हिंदूओं के अलावा सभी दलित और मुस्लिम थे। लगभग 97 फीसदी सवर्ण हिंदुओं के मामले में ब्रोकर ने मकान दिलाने की रजामंदी कर दी वहीं 44 फीसदी दलितों और 61 फीसदी मुस्लिमों के मामले में ब्रोकर ने मकान देने से साफ इनकार कर दिया। दलितों को मकान दिलाने के मामले में लगभग 51 फीसदी शर्तों के साथ ब्रोकर घर देने को तैयार थे जबकि मुस्लिमों में यह आंकड़ा 71 फीसदी तक था।

प्रोफेसर एसके थोराट का कहना है कि आज के दौर में ऐसा होना बाजार की असफलता को दिखाता है जहां एक संपन्‍न दलित-‌मुस्लिम भी अच्छे इलाकों में घर पाने को लेकर संघर्ष कर रहा है।

मुस्लिमों की स्थिति दलितों से ज्यादा बुरी

ncr homeowners turn away dalits and muslims

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर में घर पाने में मुस्लिमों की स्थिति दलितों से ज्यादा बुरी है। दूसरे राज्यों से दिल्‍ली आने वाले 18 फीसदी दलितों को सवर्ण जाति के मकान मालिकों ने मकान देने से मना कर दिया।

एनसीआर में दलितों के मामले में लगभग 23 फीसदी उन्हें किराए पर मकान देने को तो तैयार थे पर कई शर्तों के साथ जिनमें अधिक किराया और कई चीजों की मनाही भी शामिल थी। मुस्लिमों के मामले में सीधे तौर पर धर्म ही आड़े आ गया।

फोन पर किस समाज के लोगों को मकान देने से मना किया गया
सवर्ण हिंदू 0%
दलित 18%
मुस्लिम 31%

और किन लोगों को मुलाकात के बाद मकान देने से मना किया गया
सवर्ण हिंदू 3%
दलित 44%
मुस्लिम 61%

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