चुनाव बाद मोदी के पाले में आ जाएंगे शरद पवार!
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सियासत क्या-क्या रंग नहीं दिखाती। पिछले दस साल से यूपीए सरकार का हिस्सा रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने आने वाले वक्त का अंदाजा लगाते हुए शायद अपनी रणनीति बदल दी है।
शरद पवार सत्ता में बने रहने का गुर जानते हैं और यही गुर उन्हें राजनीति में अलग दर्जा दिलाता है। जब उनकी पार्टी को अहसास होने लगा कि कांग्रेस की हालत खराब है, तो उन्होंने भाजपा पर डोरे डालने शुरू कर दिए।
पवार का पावर गेम खास है। एक तरफ वो कहते हैं कि गुजरात में हुई हिंसा के लिए नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं, वहीं उनसे अपने निजी संबंधों का हवाला भी देते है। इस बीच उनकी बेटी का बयान किसी और तरफ इशारा कर रहा है। क्या पवार पाला बदलने की तैयारी में हैं?
सुप्रिया ने दी मोदी को क्लीन चिट
शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल के बाद अब एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने भी दोहराया है कि नरेंद्र मोदी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक उन्हें कानून ऐसा साबित न कर दे।
एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "आप तब तक किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाए। सिर्फ यह चिल्लाने से कुछ नहीं होता कि वो हत्यारा है...अदालत को अपना काम करने दो।"
सुप्रिया को इस बात का दुख है कि कांग्रेसी नेता एनसीपी को ऐसा साथी बताते हैं, जिस पर यकीन नहीं किया जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पार्टी केंद्र में दस साल और राज्य में 15 साल से कांग्रेस के साथ है और हर वक्त में उसके साथ डटकर खड़ी रही है।
एनसीपी क्यों कर रही है मोदी का बचाव?
यह पूछने पर कि क्या शरद पवार, राहुल गांधी के तहत काम करने को लेकर परेशानी महसूस करते हैं, सुप्रिया ने कहा, "उन्होंने (पवार) ठीक कहा है कि वह राहुल से 40 साल सीनियर हैं। सुप्रिया ने कहा कि राहुल और उनके पिता के बीच पीढ़ी का अंतर है और वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ ज्यादा अच्छा तालमेल रखते हैं।"
शरद पवार का उत्तराधिकारी बनने को लेकर एनसीपी में जो बवाल चल रहा है, उस पर उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में काम करने में बढ़िया महसूस करती हैं और पवार के भतीजे एवं डिप्टी सीएम अजित पवार के साथ उनका कोई विवाद नहीं है।
इससे पहले प्रफुल्ल पटेल ने भी कहा था कि मोदी को अब अदालत की ओर से क्लीन चिट मिल चुकी है, ऐसे में गुजरात दंगों की बात को अब और आगे नहीं घसीटा जाना चाहिए।
चुनाव बाद पाला बदलेगी एनसीपी?
एनसीपी के नेताओं की तरफ से लगातार आए इस तरह के बयान इशारा करते हैं कि शरद पवार की टीम चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी और भाजपा के पाले में आ सकती है।
शरद पवार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई, तो पहले एनसीपी ने इससे पल्ला झाड़ा। लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया कि दोनों नेता मिले थे। एनसीपी के नेता लगातार मोदी पर नरम रुख वाले बयान दे रहे हैं, जो शायद चुनाव बाद की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
शरद पवार कई बार कांग्रेस और उसके नेताओं पर इशारों-इशारों में हमला कर चुके हैं, ऐसे में अगर लोकसभा चुनावों के बाद शरद पवार की पार्टी मोदी से हाथ मिला ले, तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।