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राकांपा, भाजपा की दोस्ती से घटी ठाकरे परिवार की दूरियां
मुंबई/सुमंत मिश्र
Updated Sat, 27 Oct 2012 09:13 PM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति में राकांपा और भाजपा के नेताओं के बीच बढ़ती दोस्ती इन दिनों ठाकरे परिवार के पारिवारिक मेल-मिलाप का कारण बन रही है। पांच साल से शिवसेना से अलग रहने के बाद राज ठाकरे पिछले चार महीनों में अपने चाचा बाल ठाकरे और भाई उद्धव से आधा दर्जन से अधिक बार मिल चुके हैं। मातोश्री में चल रहे इस भरत-मिलाप से कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
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पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी मनसे के कारण ही कांग्रेस को काफी फायदा हुआ था। इसीलिए मातोश्री बंगले पर कांग्रेस के दिग्गज पैनी नजर रखे हुए हैं। लेकिन महाराष्ट्र के कुछ स्थानीय निकायों में राकांपा और भाजपा के बीच समझौता व कल्याण और नासिक के अलावा कुछ अन्य निकायों में शिवसेना और मनसे का मिलन भी आगे की तस्वीर की तरफ इशारा कर रहा है।
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दो वर्ष बाद होने वाले लोकसभा और विधान सभा चुनावों में कहीं ठाकरे परिवार द्वारा स्थापित दोनों पार्टियों के बीच कॉमन एजेंडा न तय हो जाए। क्योंकि कांग्रेस के कई नेता चुनाव के पहले प्रदेश में एकला चलो का नारा बुलंद करने लगे हैं। इसी तरह शिवसेना ने 25 साल पुराने भाजपा के साथ अपने गठबंधन को दरकिनार कर राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी का समर्थन किया था।
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