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नक्सलियों की वजह से हुई गरीबों की स्थिति बदतर

Wed, 29 May 2013 11:07 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 29 May 2013 11:07 PM IST
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naxals worse due to poor conditions

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कहा कि नक्सली समाज कल्याण कार्यक्रमों को गरीबों तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं। नक्सली गरीबों के हितैषी होने का दावा करते हैं लेकिन उनके हिंसा का रास्ता अपनाने से गरीबों की स्थिति और खराब हुई है।

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छत्तीसगढ़ में 25 मई की वारदात के चार दिन बाद मानवाधिकार आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि नक्सलवादियों के रवैये के कारण समाज कल्याण कार्यक्रमों का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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नक्सलवादी गरीबों के हितैषी होने का दावा करते हैं और उन्हीं के हित में हिंसा को जायज ठहराते हैं लेकिन नक्सलियों के कारण ही गरीबों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का अभाव बढ़ता जा रहा है।
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नक्सलवादियों ने सिर्फ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सप्लाई होने वाले अनाज को रोकने की कोशिश नहीं की है। चूंकि पीडीएस की आपूर्ति से ही नक्सलवादियों को भी खाद्य पदार्थ उपलब्ध होता है।

गरीब तथा निरक्षर परिवार के बच्चों को ही नक्सली अपने कैडर में भर्ती करते हैं। इसलिए नक्सलियों के लिए हिंसा का रास्ता उनकी अपनी हित साधना का तरीका है। गरीबों के लिए हिंसा का दावा करना एक छलावा है।

आयोग ने इस बात की आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में नक्सलवादियों की ओर से हिंसा में इजाफा किया जा सकता है। राज्य सरकार 25 मई की हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की धरपकड़ का अभियान तेज करेगी और नक्सली प्रतिक्रिया स्वरूप हिंसा का सहारा लेंगे।

पिछले माह रायपुर में हुई बैठक में पुलिस अफसरों ने आयोग को बताया था कि सुरक्षा एजेंसियों को घेरे जाने पर नक्सली ग्रामीणों का इस्तेमाल करते हैं। यदि गांव के लोग नक्सलियों का साथ नहीं देते तो उन्हें परेशान किया जाता है।

आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि नक्सलवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में निर्दोष लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। गरीब आदिवासी हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।

आयोग ने कहा कि वह छत्तीसगढ़ की घटनाओं पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है। सलवा जुडूम पर मानवाधिकार आयोग अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को पहले ही सौंप चुका है।


मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष केजी बालाकृष्णन ने पिछले माह रायपुर का दौरा किया था। उनके साथ आयोग के सभी सदस्य भी थे। हिंसा के शिकार ग्रामीणों ने आयोग के समक्ष विस्तार से अपनी बात कही थी।

आयोग के दो सदस्यों ने दंतेवाड़ा का भी दौरा किया था। हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित बस्तर क्षेत्र का जायज लेने के लिए सदस्य वहां गए थे।

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